छत्तीसगढ़ के गुरतुर भाखा,
अड़बड़ मीठ मीठ आय।
जभे मिले संग संगवारी मन,
अड़बड़ मजा जी आय।
छत्तीसगढ़ के चीला रोटी,
अड़बड़ संगी मिठाय।
संगे खावौ पताल चटनी,
मन हा अड़बड़ ललचाय।
रतिहा के बाँचे भात संगी,
कभो नइ ता फेंके जाय।
रतिहा ओला पानी मा बोरौ,
बिहनिहा बासी बन जाय।
बासी मा खावौ मिरचा चटनी,
गोंदली सँग बासी मिठाय।
बासी मा भरे पानी ला संगी,
सुरूट सुरूट पिये जाय।
छत्तीसगढ़ के सेकवा रोटी,
रोठ मोट बनाए जाय।
दुए ठन रोटी मा हमर पेट हा,
खम खम ले भर जाय।
छत्तीसगढ़ के सोहारी रोटी,
नावा चउँर मा मिठाय।
ताते ताते ओला खाके संगी,
सबो रोटी के सुरता भुलाय।
छत्तीसगढ़ के ठेठरी खुरमी,
चाबे मा नई त चबाय।
ऐला खाय ले हमर मुहुँ ले,
कुरूम कुरूम बाजे जाय।
छत्तीसगढ़ के गुरतुर भाखा,
अड़बड़ मीठ मीठ आय।
सबो मया ले गोठियाए रे संगी,
मन हा गदगद हो जाय।