Sunday, 1 December 2019

मनहरण घनाक्षरी-छत्तीसगढ़ी

मनहरण घनाक्षरी-श्रीमती आशा आजाद

छत्तीसगढ़ ला जानौ,भाखा मीठ हे मानौ।
गुत्तुर भाखा सबला,अबड़ सुहात जी।
तोर मोर बोली हावै,हँसी ठिठोली हा भावै।
दाई ददा बोलै मा जी,मन मुस्कात हे।
सब जै जोहार बोलैं,मन मधुरस घोलैं,
संस्कार भुइयाँ के जी,मया ला बढ़ात हे।
जुरमिल गोठियावौ,भाखा गीत सब गावौ,
राज के माटी हा जी,भाग चमकात हे।

छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

Friday, 8 November 2019

प्रदीप छंद-गीत


प्रदीप छंद-16-11-पदांत-212

विषय-बिगड़त हावय आज देखलव,
                      हालत ह वर्तमान के ।

बिगड़त हावय आज देखलव,
                       हालत ह वर्तमान के।
अपना कोन पराया भूलिन,
                       दुश्मन होगिन जान के।

(1)
रिश्ता नाता भूलत हावै,
                         मानवता से दूर हे।
मान लुटत हे बेटी के अब,
                     ओ कतका मजबूर हे।
मतलब भाव हा पनपत हावै,
                     कीमत नइ हे जान के।
बिगड़त हावय आज देखलव,
                      हालत ह वर्तमान के ।

(2)
छल कपट के भाव भरे हे ,
                     कलुषित होवत आज हे।
अनाचार अउ पाप बाढ़गे,
                        दोषी जन के राज हे।
कहाँ छुपावय मन के पीरा,
                          परंपरा नइ दान के।
बिगड़त हावय आज देखलव,
                        हालत ह वर्तमान के ।

(3)
लोभ मोह मा जलथें नेता,
                         सत्ता के बस लोभ हे।
छलत हावै गरीब जन ला,
                      कभू नइ होवत क्षोभ हे।
कलयुग के मानव जहरीला,
                            देखावा सम्मान के।
बिगड़त हावय आज देखलव,
                          हालत ह वर्तमान के ।

रचनाकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

सरसी छंद गीत

सरसी छंद गीत-श्रीमती आशा आजाद

मस्तुरिया जी सान राज के,
                      नेक रहिन इंसान।
मानवता के पाठ पढ़ायिन,
                   गुण के राहिन खान।
(1)
संग चलव रे गीत ल गाके,
                       सुग्घर दिन संदेश।
दीन दुखी के संग चलव रे,
                 कहिन मिटादव क्लेश।
छत्तीसगढ़ म सोना जइसन,
                     नायक के पहिचान।
मस्तुरिया जी सान राज के,
                        नेक रहिन इंसान।

(2)
आशा आस्था उमंग साहस,
                   युवा गीत के बोल।
छत्तीसगढ़ी भाखा सुग्घर,
               ज्ञान दिहिन अनमोल।
चंदैनी गोंदा मा कह दिन,
                  हे किसान भगवान।
मस्तुरिया जी सान राज के,
                    नेक रहिन इंसान।

(3)
रंगमंच के नायक राहिन,
                 कला रहिस भरमार।
ए भुइयाँ मा हीरा जइसन,
                      बेटा के अवतार।
वर्तमान मा ज्ञान दान हा,
              हमर बनिस अभिमान।
मस्तुरिया जी सान राज के,
                     नेक रहिन इंसान।

(4)
हमर राज के नेक धरोहर,
                   गला म खूब मिठास।
जन ला नित संदेश दिहिन जी,
                     अंतस भर विश्वास।
छत्तीसगढ़ी लेखन धारा,
                    अमिट राज सम्मान।
मस्तुरिया जी सान राज के,
                        नेक रहिन इंसान।

रचनाकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

विधाता छंद

विधाता छंद 122×4

जिहाँ कलकल बहय नदियाँँ,उही हा राज हमर हावै।
जिहाँ हे मीठ रस भाखा,उही हा मान हमर हावै,
कहयँ छत्तीसगढ़ माटी,बड़ा ममहात राहय जी,
जिहाँ हे धान के कोठी,उही हा शान हमर हावै।।

मनहरण घनाक्षरी

मनहरण घनाक्षरी

छत्तीसगढ़ के महिमा

छत्तीसगढ़ ला मानौ,धन के भंडार जानौ।
कलकल नदियाँ हा,सुघर बोहात हे।
कौशल नाव धरायें,माटी बड़ ममहायें,
हरिहर धान पान,अबड़ सोहात हे।
खनिज भंडार भरे,बेलाडिला लोहा धरे,
सुघर पहाड़ी मैना,मीठ गीत गात हे।
पंथी नाचा खूब भावै,सुवा गीत बड़ गावै,
भुइँया महतारी के,सुघर सौगात हे।

रायपुर राजधानी,गुत्तुर सबो के बानी,
एक नंवबर के जी,शुभ दिन मनात हे।
झरना झिरिया सोहे,दया मया मन मोहे,
नागवंशी के रहाई,सियान बतात हे।
उर्जा नगरी कहाथें,बड़ चीज बरसाथें,
भुइयाँ हा खान धरें, राज ला बढ़ात हे।
भुइयाँ के सुग्घर माटी,नीक केशकाल घाटी,
कोयला हा कोरबा के,मोल ला बतात हे।

न्यायपालिका हावै,अभ्यारण मन भावै,
देवभोग सोना धरे,माथ चमकात हे।
गोंदा इहाँ खूब फूले,आमा रुख मा झूले,
टप टप पाके आमा,मन ललचात हे।
इहाँ बड़ तिहार होथें,धान इहाँ बड़ बोथें,
मीठा रोटी पीठा ला जी,अबड़ बनात हे।
हावै धान के कटोरा,सुघर जी मानय पोरा,
धान भंडार हा जी,भाग चमकात हे।

Tuesday, 29 October 2019

लोकगीत-मोर मयारू जोड़ी आजा

छत्तीसगढ़ का लोकगीत....✍️

🌹मोर मयारू जोड़ी आजा🌹

*मोर मयारू जोड़ी आजा,*
                    *तोरे रद्दा जोहत हौ।*
*छिन छिन मोला अबड़ सतावै,*
                *तोर मया मा रोवत हौ।*

*अब्बड़ मँय हा तरसत हावौ,*
              *मया ला तोर भुलाये हौ।*
*सरी सरी रतिहा मँय जागौ,*
                *कतक पीरा छुपाये हौ।*
*आजा तरसत हावै नैना,*
                  *बैरी पल ला बोहत हौ।*
*मोर मयारू जोड़ी आजा,*
                      *तोरे रद्दा जोहत हौ।*

*अंतस हिरदे तही समाये,*
               *ये पीरा ले कलपत हो।*
*आस लगे हे मिलबो जोही,*
         *मिलन होय कब तरसत हौ।*
*संगी साथी सबो छूटगे,*
              *नाता सबला खोवत हौ।*
*मोर मयारू जोड़ी आजा,*
                     *तोरे रद्दा जोहत हौ।*

*भूख प्यास ला सबो भुलाये,*
             *दुख मा आँसू पीयत हौ।*
*माथ मा सेंदुर तोर नाव के,*
             *इही आस मा जीयत हौ।*
*कब लाबे बरात गा जोही,*
           *रहि रहि ये मँय सोचत हौ।*
*मोर मयारू जोड़ी आजा,*
                     *तोरे रद्दा जोहत हौ।*

रचनाकार-श्रीमती आशा आजाद...✍️
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

Tuesday, 22 October 2019

मनहरण घनाक्षरी(कवित्त छंद)

मनहरण घनाक्षरी छंद

दारू झन पी

दारू काहे पिये संगी,घर मा जी रहे तंगी,
परिवार वाला मन,बड़ खिसियात हे।
बिख हावै तैहा जान,पियौं नइ मन ठान ,
लीवर सड़ात बड़,बिमारी बढ़ात हे।
नशा सब छोड़ दे जी,मुँहु तँय मोड़ दे जी
अभी माते मनखे हा,पाछु पछतात हे।
घर दुरा लुट जाही, मिले नइ तोला काही,
समै बलवान हावै,तोला ये सिखात हे।

मनहरण घनाक्षरी(कवित्त छंद)

मनहरण घनाक्षरी(कवित्त छंद)

यातायात नियम

सबझन ध्यान धरौं,लापरवाही ले डरौ,
सुग्घर धियान देके,वाहन चलाव जी।।
जीव अनमोल हवै,सुरक्षा के बोल हवै,
यातायात नियम ला,सुघर निभाव जी।।
अनहोनी होवत हे,जिनगी ल खोवत हे,
दुरघटना ले सब,जीव ला बचाव जी।।
नियम के पालन हो,धीर चले वाहन हो,
राह चलै सावधानी,सबो अपनाव जी।।

Sunday, 13 October 2019

अरविंद सवैया-गुरु

अरविंद सवैया-श्रीमती आशा आजाद

परनाम करौ गुरु पाँव परौ गुण के सँग देवत हे पहिचान।
सब ला सत राह दिखावत हे बरसावत हे किरपा सुख मान।
पढ़ले गुनले सच गोठ सदा धर ले जिनगी बर नेक विधान।
निज काज करौ नित ध्यान धरौ फलदायक हे गुरु के सद ज्ञान।

समभाव धरे हिरदे म सदा नित देश करैं सुन लेव विकास।
अभिमान हवे गुरु नाव रटे जिनगी ल गढ़े बन जावय खास।
बगराइन हे गुरु ज्ञान सदा पढ़लौ गुनलौ पिछला इतिहास।।
गुरु जोत जलावत हे मन भीतर ये जिनगी ल करौं ग उजास।।

छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर,कोरबा,छत्तीसगढ़

अमृतध्वनि छंद-सुग्घर सिरजन

अमृत ध्वनि छंद-श्रीमति आशा आजाद

सुग्घर सिरजन*

सुग्घर सिरजन सब करौ,करदँव सब उद्धार।
नव मारग मा होय जी,चले कलम के धार।।
चले कलम के-धार होय जी,नित उजियारा।
सुग्घर कविता, गढ़ देवव जी,लागय प्यारा।।
साहित सिरजन,ज्ञान बढ़ावँय,सीखँय सबझन।
नेक सोच ले,कवि मन रचदयँ,सुग्घर सिरजन।।

*नसा नास के जड़ हवय*

दारू पीना छोड़ दे,खुद मा रख विश्वास।
नसा नास के जड़ हवँय,जिनगी झन कर नास।।
जिनगी झन कर-नास कभू गा,रहिबे बचके।
टूट जथे घर, ठेनी झगरा,पीके बमके।।
होही अपजश,तय करले तँय,कइसे जीना।
सब मिलही सुन,छोड़ दिये जे,दारू पीना।।

*जय जय भारत देश*

जय जय भारत देश के, हमर तिरंगा शान।
जम्मो मिलके कहय जी,देश हमर हे जान।।
देश हमर हे,मान अमर हे, हे महतारी।
जान इही हे,रंग तिरंगा,हे चिन्हारी।।
जनमन गावँय,वंदे गावँय,हे एके लय।
जुरमिल गावँव,तान लगालव,भारत जय जय।।

*महाशिवरात्रि*

बमबम भोले बोल रे,काँवर ला तँय थाम।
महाशिवरात्रि आज हे,शंभू के ले नाम।।
शंभू के ले,नाम जगत मा,माथ नवाले।
पूरा होही,तोर कामना,जय जय गाले।।
काँवर धरके,आजा संगे,एके होले।
पार लगाही,बोल तहूँ हा ,बमबम भोले।।

*दाई बनगे मौम*

दाई बनगे मौम जी,बेटा के नव बोल।
जान इंग्लिस बोलथे,गोठ करय बिन तोल।।
गोठ करय बिन-तोल सतावय,गवँइ गाँव मा।
शहरी बाबू, बनगे हावँय,रहय छाँव मा।।
चरन पायलगी,नइ जानय जी,मुश्किल भाई।
नाता जम्मो,भुला गये हे,रोवत दाई।।

*झन काटँव*

काहे काटँव रुख रई,एहा हावँय शान।
सुग्घर हावा देत हे,इही बचावँय प्रान।।
इही बचावँय,प्रान हमर जी,पेड़ लगालव।
जीवन देही,झन काटँव जी,मान बढ़ालव ।।
पउधा लगाँव,जतन करौ सब,सुख ला पावँव।
देही बढ़िया,छाँव जान के,काहे काटँव।।

*बेटी हे अनमोल*

हावय बेटी शान जी,बेटा जइसन मान।
बेटी हा अनमोल हे,समता ला तँय जान।।
समता ला तँय,जान जगत के,हे महतारी।
जीवन देवँय,मान बढ़ावय,ओहय नारी।।
मात-पिता के,जतन सकल कर,सुग्घर पालय।
जनम देत हे,पालन करथे,नारी हावँय।।

सुग्घर सिरजन

सुग्घर सिरजन सब करौ,जग के हो उद्धार।
पढ़के सबझन ज्ञान ले,इही कलम के सार।।
इही कलम के,सार करय जे,नित उजियारा।
सुग्घर कविता,गढ़ देवव जी,लागय प्यारा।।
साहित सिरजन,ज्ञान बढ़ावँय,सीखँय सबझन।
नेक सोच ले,कवि मन रचदयँ,सुग्घर सिरजन।।

छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

Thursday, 10 October 2019

कुण्डलिया छंद-शिक्षक

कुण्डलिया छंद-श्रीमति आशा आजाद

शिक्षक के सम्मान हो,हावै ज्ञानाधार।
निश्छल मन सद्भावना,सत्य प्रेम के सार।।
सत्य प्रेम के सार,ज्ञान के वर्षा करथें।
ज्ञान हवय अनमोल,सदा ये जीवन गढ़थें।।
कह आशा आजाद ,देश के रचथे रक्षक।
विपदा कतको जान,पार लगोइया शिक्षक।।

छंदकार-आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

चौपाई छंद-दुर्गा दाई ले अवतार

चौपाई छंद-श्रीमती आशा आजाद

दुर्गा दाई ले अवतार

आगे देखव अब नवराती।फेर जलावव दीया बाती।
पाप खतम कइसे होही माँ।नारी कब तक ले रोही माँ।

दुर्गा दाई ले अवतारी।नारी मनके दुख हे भारी।
कतका पीरा ल गोहरावौं।पग-पग दुख ला मँय हा पावौं।।

अवतारी बनके तँय आजा।नारी के पीरा ल मिटाजा।
चारो कोती अत्याचारी।मान लुटे कइसन लाचारी।।

जगा-जगा हे छुपे लुटेरा।नारी राखै कहाँ बसेरा।
आके तँय हा पार लगादे।पापी मन ले न्याय दिलादे।।

नान-नान नोनी के पीरा।जाय सुनावय काखर तीरा।
रोवत बिलखत रोजे सुनले।मात गोहार थोरक गुन ले।।

कलयुग मा नइ जीना मोला।आज बलावव दुर्गा तोला।
चुप्पे बइठे देखत दाई।अनाचार ले हे करलाई।।

मानवता ला देख भुलागे।मानुष कतका आज रुलागे।
खून खराबा बाढ़त हावै।आस तैर ले सबो लगावै।।

तँय ता सबके तारनहारी।कहे जगत तोला महतारी।
दाई कलयुग मा तँय आजा।नारी के अब लाज बचाजा।।

छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

जयकारी छंद

जयकारी छंद-श्रीमती आशा आजाद

गाँधी के अनमोल वचन

बात बेंदरा के अनमोल।बात करव जी सब झन तोल।
गाँधी जी के मंतर तीन।रहव पाप मा झन जी लीन।।

पहली बंदर मूँदे आँख।मनखे अंतस हिरदे झाँख।
सुग्घर दे दव सब सम्मान।आँखी मूदँय झन इंसान।।

दूसर बंदर कान दबाय।गारी झन ता कभू सुनाय।
देवय सबला निसदिन ज्ञान।सुनय कान सबके सम्मान।।

तीसर बंदर मुहूँ दबाय।कतका सुग्घर बात बताय।
बोलौ गुरतुर मीठा बात।सुग्घर बीते दिन अउ रात।।

मीठ प्रेम के भाखा होय।गारी पीरा ले झन रोय।
बनही कतका सुग्घर राज।नीक पहुँचही तब आवाज।।

अपने मन मा रखलव धीर।सहय कभू झन कोनो पीर।
तीन बात के रखलव ध्यान।नेक करम ले बनौ सियान।।

रचनाकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छतीसगढ़

Tuesday, 30 July 2019

बरवै छंद

बरवै छंद-श्रीमति आशा आजाद

छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस

सुग्घर भाखा हावय,अपने जान।
       छत्तीसगढ़ी भाखा,हवे महान।।1

गुरतुर मीठा सुनले,एखर बोल।
        मनखे जम्मो रस ला,देवय घोल।।2

तोला मोला कहिथे,सुग्घर भाय।
       अपन राज के भाखा,गजब सुहाय।।3

छत्तीसगढ़ी भाखा,नेक विचार।
        सब मनखे के जानौ,ये आधार।।4

अलग जिला के अलगे,बोली जान।
        जम्मो मनखे करथे,जी सम्मान।।5

कोनो आहूँ-जाहूँ,बोलय नेक।
        आबो-जाबो बोली,सब हा ऐक।।6

अंतर उच्चारन मा,कतका होय।
        छत्तीसगढ़ी सबला,हे संजोय।।7

राज अपन ला बन्दौं,बारंबार।
       सुग्घर भाखा बोलव,दव सत्कार।।8

रचनाकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़





बरवै छंद

बरवै छंद

सुग्घर जीले जिनगी,हेअनमोल।
      गोठ बात ला करबे,सुग्घर तोल।।1

अइसन गुरतुर भाखा,ला तँय बोल।
     मया पिरित के रस ला,मीठा घोल।।2

भेद भाव ला करदे,तँय हा त्याग।
     छोड़ कपट ला अंतस,मन ले जाग।।3

जगा जगा मा सुनले,बाढ़ँय नाम।
      कभू न बिगड़े करबे,अइसन काम।।4

दीन दुखी ला देबे,सुग्घर हाथ।
    बिगड़ी बन जावय गा,देबे साथ।।5

पाप पुन्य के रद्दा,अइसन होय।
      कभो न तोर करम ले,कोनो रोय।।6

छप्पय छंद

छप्पय छंद..

(1)*प्राथमिक ज्ञान*
पढ़ले पहिली पाठ,पहल कर स्कूल जाके।
  बनही जी आधार,पढ़ँव सब सुग्घर गा के।।
    खेलव कूदँव रोज,संग मा भोजन खावौ।
       मध्यांतर मा खेल,मजा कर सब घर जावौ।।
         कहँय प्राथमिक ज्ञान हा,देवय सुघ्घर सार जी।
            मिलय इही ले मान हा,बनथे जान आधार जी।।

(2)*जा बेटी ससुरार*
जा बेटी ससुरार,मया तँय राखे रहिबे।
   हवँय उही घर बार,सास ला दाई कहिबे।।
     देबे सबला मान,ससुर के सेवा करबे।
       सबो नता ला जान,मान गुन तँय हा धरबे।।
         सुमता रखबे जान ले,जम्मो दुख सुख साँठ ले।
           झन छूटय सुन थाम ले,मया दया के गाँठ ले।।

(3)*नेक रद्दा चुनले*
करम अपन हे हाथ,नेक तँय रद्दा चुनले।
  फल के आशा छोड़,धीर ला तयँ हा गुनले।।
    मिहनत मा दे ध्यान,डहर हा तोला मिलही।
       ठलहा झन तयँ बइठ,करम हा सबला दिखही।
         पूजा काम ला मान ले,मिहनत देही साथ गा।
           जिनगी इही हे जान ले,हाथ हा जगन्नाथ गा।।

(4)*झन फेंकँव भात*
काहे फेंकय भात,जगत मा पूजे जाथे।
  जीवन चलथे जान,भूख ला इही मिटाथे।।
    जांगर टोर कमाय ,अन्न के कौरा बर जी।
       अन्न दान ला करव,फेंक झन समझौ सब जी।।
         अन्न कुंवारी मान हे,जीवन इही चलाय गा।
           भोजन बिन तन नाश हे,अब्बड़ सुख पहुँचाय गा।

(5)*होली आगे*
होली आगे देख,सबो संगी जुरियावय।
   छेड़ नगाड़ा थाप,थिरक के गाना गावय।।
     अपने धुन के साज,तान ला छेड़व संगी।
       दिखत हवँय जी आज,बने हे रंग बिरंगी।।
         बने मजा के खेल ले,ठेनी जगरा छोड़ दे।
           मया पिरित के रंग ले,सब नाता ला जोड़ दे।।

(6)*मानुष तन ला जान*
मानुष तन ला जान,काल कब कहाँ ले जावय।
  अइसन कर तयँ काम,जगत हा गुन ला गावय।
    मानवता ला जान,करम तय सुग्घर करबे।
     मानुष ला पहिचान,गलत झन रद्दा चलबे।
       मरना सत हे मान ले,मानुष के नइ जोर गा।
         जियते करम सुधार ले,मरबे ता हो सोर गा।।

(7)फागुन महिना
फागुन महिना आय,रंग सबझन जी खेलव।
   भरे थाल मा रंग,मया सबझन ला देदव।।
     गीत मया के गाव,नगाड़ा धुन मा नाचव।
       सुमता रखहू जान,बैर कोनो झन राखव।।
         होली सुग्घर मानलव,हँसी खुशी के साथ जी।
           सुमता के रंग डाल लव,मिला सबो ले हाथ जी।।

(8)जी हत्या

जी हत्या हे पाप,सुवारथ मन ला डारय।
   बकरा बलि चढ़ाय,दोष बिन काहे मारय।।
     अपन करम ला त्याग,गलत रद्दा ला चुनही।
       ले डारिन ए जीव,करम नइ अपने गुनही।।
         बलि कारज ला छोड़ दे,जीव बचा झन मार गा।
             कंबल दू ठन दान दे,पाप होय बलि टार गा।।

कुण्डलिया छंद

कुण्डलिया छंद-श्रीमति आशा आजाद

(1)तार दे
मोला विद्या ज्ञान दे,माँगत हँव करजोर।
  सत के रद्दा तँय बता,विनती हावय मोर।।
    विनती हावय मोर,चलव मँय सत के रद्दा।
      पइयाँ लागौ तोर,दूर हो जावय विपदा।।
        तयँ हस तारन हार,सबोझन सुमिरय तोला।
          बाँटत हाँवस ज्ञान,तार दे दाई मोला।।

(2)सुग्घर जिनगी
जिनगी के दिन चार हे,हाँसत खेल गुजार।
   ठेनी झगरा छोड़ दे,जिनगी अपन सुधार।।
      जिनगी अपन सुधार,नेक तँय मारग चुनले।
         भेदभाव ला छोड़,मया ला हिरदे रखले।।
            दुख-सुख संगे बाँट,रहय झन बैरी संगी।
               मिलके रहिबो साथ,होय जी सुग्घर जिनगी।।

(3)नारी अवतार
मँय नारी अवतार हो,जग मा हे पहिचान।
  सरी जगत मा मान हे,देत हवय सम्मान।।
    देत हवय सम्मान,कहय जम्मो महतारी।
      बेटी दाई जान,इही ले हवय चिन्हारी।।
       सुख-दुख रहिथों थाम,करौ मँय सेवा भारी।
         धरथों नावा जीव,दरद सहिंथों मँय नारी।।

(4)झन काँटव
झन काँटव जी रूख रई,एहा हावय शान।
    जीवन हमला देत हे,इही बचावय प्रान।।
       इही बचावय प्रान,एकठन पेड़ लगावव।
          जीवन एमा जान,काट झन मान घटावव।।
             पउधा रोज लगाव,जरी मा पानी डालौ।
                देही बढ़िया छाँव,जान के रूख झन काटव।।

(5)*लालच*
झूठ लबारी गोठ ला ,मनखे मन गठियाय।
   लालच पइसा के करें,सत् ला नइ ता भाय।।
     सत ला नइ ता भाय,असत् के रद्दा धरथें।
        हावय लोभ अपार,रात दिन एके करथें।।
          जाना खाली हाथ,जगत ले आही पारी।
             अब ता मनखे चेत ,छोड़ दे झूठ लबारी।।

(6)साँई बाबा
साँई बाबा कर दया,करत हँवव गोहार।
   विपदा हावय तार दे,कर मोरो उद्धार।।
     कर मोरो उद्धार,कतक ये पीरा हावय।
       रोवत हव दिन रात,सबो दुख हा मिट जावय।
         तही हवस सुन मोर,धाम अउ मस्जिद काबा।
          अंतस मोर समाय,तही हस साँई बाबा।।

(7)गुरु
बाँटत हावय देख लव, छत्तीसगढ़ी ज्ञान।
  अरुन निगम हे गुरु हमर,सीखवँ छंद विधान।।
      सीखव छंद विधान,ध्यान ला थोरिक धरलव।
        छंद साधना जान,सबो झन मिहनत करलव।।
          जम्मो साज सिखायँ,इही नव पाठ चलावयँ।
             गुनले गुरु के ज्ञान,आज जे बाँटत हावयँ।।

(8)छंद ज्ञान
जुरमिल पढ़थे पाठ ला,नित दिन देवय ध्यान।
   निगम गुरु के चरन मा,साधक के परनाम।।
      साधक के परनाम,हमन सब ध्यान ल धरबो।
         जुरमिल एके साथ,सबो झन मिहनत करबो।।
            होही जी उद्धार,छंद ला जम्मो गढ़थे।
              छंद साधना कहाय,इहा सब जुरमिल पढ़थे।।

(9)सीखबो छत्तीसगढ़ी
छत्तीसगढ़ी छंद के,बाँटत हे जी ज्ञान।
   अरुन निगम हे गुरु हमर,सीखवँ छंद विधान।।
      सीखवँ छंद विधान,ध्यान ला थोरिक धरलव।
         छंद साधना जान,सबो झन मिहनत करलव।।
           जम्मो साज सिखायँ,चलव जुर मिलके बढ़ी।
             ऐमा धियान लगाव ,सीखबो छत्तीसगढ़ी।।

रचनाकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-एसइसीएल मानिकपुर कोरबा (छ.ग.)

बरवै छंद

बरवै छंद

सुग्घर जीले जिनगी,हेअनमोल।
      गोठ बात ला करबे,सुग्घर तोल।।1

अइसन गुरतुर भाखा,ला तँय बोल।
     मया पिरित के रस ला,मीठा घोल।।2

भेद भाव ला करदे,तँय हा त्याग।
     छोड़ कपट ला अंतस,मन ले जाग।।3

जगा जगा मा सुनले,बाढ़ँय नाम।
      कभू न बिगड़े करबे,अइसन काम।।4

दीन दुखी ला देबे,सुग्घर हाथ।
    बिगड़ी बन जावय गा,देबे साथ।।5

पाप पुन्य के रद्दा,अइसन होय।
      कभो न तोर करम ले,कोनो रोय।।6

बरवै छंद

बरवै छंद-श्रीमती आशा आजाद

पानी के कीमत ला जान

पानी के कीमत ला,मनखे जान।
     फोकट झन फेकौं जी,हवे परान।।1

बूँद बूँद ला राखव,जतनव रोज।
     कीमत नइ जानहूँ,करहूँ खोज।।2

बुरा समय ला जानौ,करलौ काम।
     प्यासा पीये मनखे,लेवय नाम।।3

जग के हित मा पानी,सबो बचावँ।
      गुनलव पानी ला झन,जान गवावँ।।4

कतका पीरा होवय,तँय ये मान।
      रोवत बिलखत हे सुन,खोय परान।।5

गंदा पानी पीये ,कतका रोय।
       कतक बिमारी मा सुन,तन ला खोय।।6

चेत धरौ सब मानौ,मोरे गोठ।
       जिनगी बचही कहिथौ,मँय हा पोठ।।7

रचनाकार-श्रीमति आशा आजाद
पता -मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

बरवै छंद

बरवै छंद-श्रीमति आशा आजाद

छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस

सुग्घर भाखा हावय,अपने जान।
       छत्तीसगढ़ी भाखा,हवे महान।।1

गुरतुर मीठा सुनले,एखर बोल।
        मनखे जम्मो रस ला,देवय घोल।।2

तोला मोला कहिथे,सुग्घर भाय।
       अपन राज के भाखा,गजब सुहाय।।3

छत्तीसगढ़ी भाखा,नेक विचार।
        सब मनखे के जानौ,ये आधार।।4

अलग जिला के अलगे,बोली जान।
        जम्मो मनखे करथे,जी सम्मान।।5

कोनो आहूँ-जाहूँ,बोलय नेक।
        आबो-जाबो बोली,सब हा ऐक।।6

अंतर उच्चारन मा,कतका होय।
        छत्तीसगढ़ी सबला,हे संजोय।।7

राज अपन ला बन्दौं,बारंबार।
       सुग्घर भाखा बोलव,दव सत्कार।।8

रचनाकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़





बरवै छंद

बरवै छंद- श्रीमती आशा आजाद

दिव्यांग दिवस

तन ले होय भले जी,जे दिव्यांग।
   नइ जाने जी एमन,करना स्वांग।।1

सबो काम ला जानय ,येमन आज।
   मिहनत ले करथे ओ,निसदिन काज।।2

हिरदे मा राखत हे ,मीठा भाव।
    जीत लेय जी अइसन,जेन स्वभाव।।3

खुदे कमावय पोषय,कतका पेट।
    कतको दुख पीरा ला,रखय समेट।।4

मन के होवय सुग्घर,सबला जान।
    भूले झन करिहौ जी,सुन अपमान।।5

मनखे बढ़ियाँ रहिथे,सुग्घर गोठ।
    असत भावना नइ हे,कहिंथो पोठ।।6

सुग्घर गुत्तुर बानी,मीठा बोल।
    मानवता के रस ला,राखव घोल।।7

आघू बढ़ जावौ सब,हिम्मत लाव।
    मुश्किल ला देखत ही,दूर भगाव।।8

कर्मठता ले सबझन,आघू आव।
    अपने करम ले सुघ्घर,नाम कमाव।।9

रचनाकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

बरवै छंद

बरवै छंद

बेटी बचावव

जन जन ला ये देदव,नेक विचार।
    नोनी-बाबू एके,सम आधार।।1

लोभ मोह मा फँसके,करथे नाश।
     भ्रूण नाश ले टूटे,हे विश्वास।।2

बसे मइल ला मन के,सबझन धोय।
     पाछु पछताय करनी,करके रोय।।3

भेद मिटावय समता,एक बनाय।
     घर-घर बेटी जन्मे ,खुशी मनाय।।4

बोझ समझ के करथे,कतका पाप।
     इही जनम देवइया,नोहय श्राप।।5

धरती मा जन्मे हे,माँ अवतार।
     इही ले हावय सुग्घर, घर संसार।।6


बरवै छंद

बरवै छंद

गुरु के महिमा हावय,अपरंपार।
      गुरु देत हे हमला,सब आधार।।1

पसबके करथे सुनले,बेड़ा पार।
     नेक करम ला देवै,सुग्घर सार।।2

पबरित मन ला रखथें,गुण अनमोल।
     सरी जगत मा नइ हे, एखर मोल।।3

जगगम बरथे किस्मत,अपने जान।
      प्रेम भाव हा गुरु के,अबड़ महान।।4

नवा राह के देवय,नित संदेश।
      द्वेष भाव अउ मिटथे,छिन मा क्लेश।।5

सरी जगत के हावय,ये सरताज।
      नेक करम ला बाँटय,सुग्घर साज।।6

सउँवत हावय गुनलौ,ये भगवान।
       देखावय नित रद्दा,दय पहिचान।7

बरवै छंद-छंद परिवार

बरवै छंद...

छंद परिवार

छंद साधना करथे ,नितदिन जान।
    ज्ञान देत हे धरलौ,सबझन ध्यान।।1

गुरु ला सबझन सुमिरौ,धरलव पाँव।
      छंद साधना गुरु के,हावय छाँव।।2

भाई बहिनी रहिथे,संगे जान।
     भाईचारा सुग्घर, हे सम्मान।।3

सुग्घर कक्षा होवय ,रोजे देख।
     जगा जगा मा बाढ़य,पढ़लव लेख।।4

दया मया हा बहिथे,इहाँ अपार।
       छंद साधना सुग्घर, नव आधार।।5

गुरु के महिमा मुख ले,नइ ता होय।
       छंद सार मा डूबे,रहिथे खोय।।6

सुग्घर दीदी भैया,देवय सार।
       ज्ञान ध्यान अउ सुग्घर,दय व्यवहार।।7

गुरु के सुग्घर भाखा,गुरतुर बोल।
        छंद साज रस देवय,नितदिन घोल।।8

सुग्घर सबझन साधव,छंद विधान।
        नित साधे ले बड़ही,अपने ज्ञान।।9







Monday, 22 July 2019

छत्तीसगढ़ी लोकगीत

छत्तीसगढ़ी लोकगीत

छत्तीसगढ़ के गुत्तुर भाखा,
     अड़बड़ मीठ मीठ आय।
          जभे मिले संग संगवारी मन,
              अड़बड़ मजा जी आय।

(1)छत्तीसगढ़ के चीला रोटी,
         अड़बड़ संगी मिठाय।
             संगे खावौ पताल चटनी,
                 मन हा अड़बड़ ललचाय।
                      छत्तीसगढ़ के गुत्तुर.....

(2)रतिहा के बाँचे भात संगी,
         कभो नइ त फेंके जाय।
             रतिहा ओला पानी मा बोरौ,
                   बिहनिया बासी बन जाय।
                        छत्तीसगढ़ के गुत्तुर....

(3)बासी मा खावौ मिरचा चटनी,
        गोंदली संग म कतक मिठाय।
              बासी मा भरे पानी ला संगी,
                  सुरूँट सुरूँट पिये  जाय।
                        छत्तीसगढ़ के गुत्तुर....

(4)छत्तीसगढ़ के सेकवा रोटी,
         रोठ मोट बनाये जाय।
               दुए ठन रोटी मा हमर पेट हा,
                    खम खम ले भर जायं।
                         छत्तीसगढ़ के गुत्तुर...

(5)छत्तीसगढ़ के सोहारी रोटी,
        नावाँ चउँर मा मिठाय।
             ताते ताते ओला खाके संगी,
                 सबो रोटी के सुरता भुलाय।
                      छत्तीसगढ़ के गुत्तुर...

(6)छत्तीसगढ़ के ठेठरी खुरमी,
        चाबे मा नई त चबाय।
             ऐला खाय ले हमर मुहुँ ले,
                 कुरूँम कुरूँम बाजे जाय।
                      छत्तीसगढ़ के गुत्तुर..

(7)छत्तीसगढ़ के गुरतुर भाखा,
        अड़बड़ मीठ मीठ आय।
             सबो मया ले गोठियाए रे संगी,
                  मन हा गदगद हो जाय।
                        छत्तीसगढ़ के गुत्तुर....

लोकगीत रचनाकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर,मानिकपुर,छत्तीसगढ़