Wednesday, 30 December 2020

छप्पय छंद-दिसंबर ले जा ए साल

छप्पय छंद- दिसंबर ले जा


ले जा तँय ये साल, दिसंबर हावय विनती ।

कोरोना ले मौत, नही अब एखर गिनती ।।

खतरनाक ये साल, कहर ये हा बरपाइस ।

अनुशासन के रोक, रास नइ एहा आइस ।।

भारत के सब नागरिक, डर के साया मा खड़े ।

कोरोना से भय अबड़, मनुज सोच मा हे पड़े ।।


लइका के ए साल, पढ़ाई नइ हे पूरा ।

शाला जाना बंद, पाठ्यक्रम सबो अधूरा ।।

उन्नति के ये मार्ग, सुनौ कुछु नइ हे अच्छा ।

देखौ लगिस विराम, पढ़े के खोवय इच्छा ।।

ज्ञान ध्यान सब भूलथे, लइका जम्मो आज जी ।

खेलकूद मा व्यस्त हे, भूलिन पढ़ना काज जी ।।


कष्ट भरे ये साल, नही हे रोजी मानौ ।

संकट बहुत विशाल, गरीबी अब्बड़ जानौ ।

तड़पय नित्य किसान, धान के पड़गे लाले ।

बिलखत सब परिवार, विकट दिन आइस काले ।।

जन जन रोवत हे अबड़, बेकारी ले त्रस्त हे ।

नेता मन ला का फिकर, सत्ता मा ओ मस्त हे ।।


दुखी अबड़ मजदूर, परत हे आसूँ पीना ।

आय कहाँ ले होय, परत हे लांघन जीना ।।

हावय राशन कार्ड, अन्न पुरथे नइ इनला ।

बीमारी नइ पीर, भूख ले मारय मनला ।।

दीन दुखी के हाल जी, रोवत सबके नैन जी ।

स्वस्थ देह कइसे मिलय, खोइन दिन के चैन जी ।।


Wednesday, 23 December 2020

छप्पय छंद

छप्पय छंद 

प्रीत बड़ा तड़पाय,हृदय व्याकुल है मेरा।
तकती हूँ मै राह,रात से हुआ सवेंरा।।
इन नैनों को आस,नीर है झर झर बहते।
तुम दोगे आवाज,राह को हरदम तकते।
मेरे मन की यह व्यथा,सुनते सारे लोग है।
दीवानी सी फिर रही,दर्द भरा ये रोग है।।

सखियों का वह शोर,अब न भाये सजना।
भूख प्यास सब त्याग,भूल गई मैं सँवरना।।
मुझको विरह सताय,सोच में निसदिन रहती।
अश्क बने अंगार,सनम आओ ये कहती।।
मेरी है यह दुर्दशा,हर क्षण जपती नाम हूँ।
आकर मुझको थाम लो,देती ये पैगाम हूँ।।

Tuesday, 1 December 2020

दोहा-छत्तीसगढ़ राजभाषा दिवस

दोहावली - आशा आजाद"कृति


छत्तीसगढ़ राजभाखा दिवस


आज राजभाखा दिवस ,छत्तीसगढ़ म जान ।

भाखा सुघ्घर नेक हे , हमर राज के सान ।


हमर राज के ध्येय हे , होवय भाखा पोठ ।

मनखे मनखे बोल लय, सुघ्घर गुत्तुर गोठ ।।


जन जन के हिरदे बसे , छत्तीसगढ़ी बोल ।

समझौ मनखे बात ला , भाखा हे अनमोल ।।


देवौ सब सम्मान जी , सुघ्घर नित बगराव ।

हिरदे ले बोलौ सबो, राखौ सबो लगाव ।।


काहे सरमावत हवौ ,  बोले बर ए बोल ।

भाखा सुघ्घर नीक हे , अंतस रस दव घोल ।।


जनमभूमि हा हे इही , इहे करे हम कर्म ।

करमभूमि बर काज कर , सुघर निभावौ धर्म ।।


झन भूलौ उपकार ला , सुघर हमर हे राज ।

भाखा मा संदेव दव , करौ राज बर काज ।।


छंदकार- आशा आजाद"कृति"प

ता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़




Monday, 2 November 2020

मनहरण घनाक्षरी छत्तीसगढ़

मनहरण घनाक्षरी-श्रीमती आशा आजाद

छत्तीसगढ़ ला जानौ,भाखा मीठ हे मानौ।
गुत्तुर भाखा सबला,अबड़ सुहात जी।
तोर मोर बोली हावै,हँसी ठिठोली हा भावै।
दाई ददा बोलै मा जी,मन मुस्कात हे।
सब जै जोहार बोलैं,मन मधुरस घोलैं,
संस्कार भुइयाँ के जी,मया ला बढ़ात हे।
जुरमिल गोठियावौ,भाखा गीत सब गावौ,
राज के माटी हा जी,भाग चमकात हे।

छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

त्रिभंगी छंद लक्ष्मण मस्तुरिया

 त्रिभंगी छंद - श्रीमती आशा आजाद

लक्ष्मण मस्तुरिया,गीत रचइया,देश राज सब,छोड़ दिये।
सुग्घर सब बानी,अमिट कहानी,सुग्घर तँय हा,राज किये।
अमरित ला छोड़े,मुख ला मोड़े,रोवत सबला,छोड़ चले।
हिरदे हा रोवय,हीरा खोवय,तोर जाय ले,दिल ह जले।।

छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर,कोरबा,छत्तीसगढ़

Monday, 17 August 2020

सरसी छंद-रामलला के संदेश

गीत-रामलला के संदेश

अवधपुरी मा रामलला के,मंदिर के निर्माण।
अंतर मन ले श्रेष्ठ बनौ जी,होही जग कल्याण।।

प्रेम भाव ला हिरदे राखौ,कहिथे जी श्रीराम।
मानवता के राह चलौ सब,करलौ जग मा नाम।
द्वेष कपट के भाव त्याग दव,कहिथे वेद पुराण।
अंतर मन ले श्रेष्ठ बनौ जी,होही जग कल्याण।।

दीन दुखी के सेवा करबो,इही बनालौ ध्येय।
धर्म निभाके ए भुइयाँ मा,मनुज बनय उपमेय।
राम नाम के अनुपम वाणी,मन मा फूँकय प्राण।
अंतर मन ले श्रेष्ठ बनौ जी,होही जग कल्याण।।।।

लोभ मोह छिन भर के मानुष,रखौ बात के ध्यान।
मिहनत करना हे जिनगी मा,श्रेष्ठ इही हे ज्ञान।
कर्म सुघर होही तब मिलही,मनखे ला निर्वाण।
अंतर मन ले श्रेष्ठ बनौ जी,होही जग कल्याण।।

रचनाकार-आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़


कुकुभ छंद-शहीद मन के कुर्बानी

कुकुभ छंद - आशा आजाद

शहीद मन के कुर्बानी

देश प्रेम हा लहू लहू मा,दिहिन देश बर कुरबानी।
हिंदुस्तान के आजादी मा,याद रही सब बलिदानी।।

मंगल पांडे खूब लड़िस जी,सच्चा ओ क्रांतीकारी।
स्वतंत्रता संग्रामी बनके,होगे दुश्मन बर भारी।।

बिस्मिल के साहस ला जानौ,धूल ब्रिटिश ला चटाये हे।
तीस साल के उमर रहिस तब ,मरके फरज निभाये हे।।

खुदीराम के साहस बढ़के,जोश अबड़ राखै भारी।
सरकारी दफ्दर मा करदिस,बम के ओ गोला बारी।।

वीर भगत सुखदेव शूर अउ,राजगुरू हे संग्रामी।
अशफाई उल्लाह खान ला,कहिथे सच्चा सेनानी।।

वीर चन्द्रशेखर के साहस,कांड करिस ओ काकोरी।
घायल हो गिस लड़ते लड़ते,छुटिस सांस के तब डोरी।।

कहय लाजपत जेला सबझन,सच्चा ओ क्रांतिकारी।
नाव उधम सिंह साहस रखके,खूब करिस जी बम बारी।।

छंदकार - आशा आजाद
पता - 

गद्य-हमर स्वतंत्रता सेनानी

आज स्वतंत्रता दिवस के दिन भारत ला आजादी दिलाने वाला मतवाला,सच्चा सेनानी मन ला याद करत हावन जेखर कुरबानी ले भारतीय मन ला मुक्ति मिलिस हे।

1-मंगल पांडेय-मंगल पांडेय घलो एक क्रांतिकारी रहिस भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के पहिली नायक रहिन।जेखर विद्रोह के चिंगारी ले पूरा उत्तर भारत ला आग के शोला मा बदल दिये रहिस,दिल्ली मा चारो मुड़ा लाश बिछे रहिस।अंग्रेज मन अब्बड़ डर गे रिहिन अउ इही डर के कारन ओला रातो रात 8-अप्रैल 19 1857 के फाँसी मा लटका दिहिन।अंग्रेजी सासन के दमनकारी कानून एखर लिए बनाइन के कोनो अब मंगल पांडेय झन पैदा होय।

2-खुदी राम बोस-सबले नौजवान स्वतंत्रता सेनानी रहिस।स्वतंत्रता के लड़ाई के शुरुआत मा ही कूद पड़िस,बचपन ले ही देश भक्ति के भावना मा स्कूल मा अपन गुरुजी ले पिस्तौल मांग लिहिस जेखर ले मै अंग्रेज मन ला मार सकौ।16 साल मा ही ओहा पास के पुलिस स्टेशन ला बम ले उड़ा दिहिस।ए जुरुम बर 18 अगस्त 1908 के ओला अंग्रेजी सासन हा फाँसी मा चढ़ा दिहिस,ओ बखत ओ 18 साल आठ महिना के रहिस।

3-रामप्रसाद बिस्मिल
भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के क्रांतिकारी धारा के एक प्रमुख सेनानी रहिस,जेला ब्रिटिश शासन के विरोध करे बर तीस साल के उमर मा 1927 के ओला फाँसी मा चढ़ा दिये गिस।राम प्रसाद बास्मिल हा काकोरी कांड ला अंजाम दिये रहिस।

4-अशफाक उल्लाह खान
भारतीय स्वतंत्रता संग्रामी के एक प्रमुख सेनानी रहिस।ओला काकोरी कांड मा बहु बड़े भूमिका निभाये के खातिर ओखर उपर अभियोग चलाइन अउ 19 सितंबर 1927 के ओला फैजाबाद जेल मा फाँसी चढ़ा दिन।

5-लाला लाजपत राय
लाला जी पंजाब केसरी के नाव ले प्रसिद्ध रहिस।भारतीय जसनल काग्रेस के लाला लाजपत राय "लाल-बाल-पाल"के तिगड़ी मा सामिल रहिस।ए तीनो झन काग्रेस के प्रमुख नेता रहिन।1914 मा इन मन ब्रिटेन अउ भारत के हालचाल ला बताये गये रहिन फेर विश्व युद्ध के कारन ले वापिस लहुटे नइ सकिन।1920 मा जब भारत आइन त जलियाँवाला बाग हत्याकांड होय रहिस ओखर विरोध मा जंग छेड़ दिहिन। ए बीच मा अंग्रेज उपर लाठी चार्ज कर दिहिन ओखर बाद अंग्रेज मन के अतियाचार ले ओ घायल हो गिस अउ लाला लाजपत राय के 17 नवंबर 1928 के मउत होगे।

5-चन्द्र शेखर आजाद
1921 मा बनारस के सत्याग्रह आंदोलन के दमन हा ओखर जिनगी बदल दिहिस।1922 मा गाँधी जी द्वारा असहयोग आंदोलन ला बंद करे के बाद ओखर विचारधारा मा बदलाव आइस अउ ओ क्रातीकारी रद्दा मा रेंगिस,ओ "हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन" के सक्रिय सदस्य बन गिस।ए संस्था ले जुड़के राम प्रसाद बिस्मिल के मार्गदर्शन मा 19 अगस्त के काकोरी कांड ला अंजाम दिहिस,अउ फरार होगे।ओखर बाद भगत सिंह के साथ लाहौर मा लाला लाजपत राय के मउत के बदला मा "साण्डर्स "के हत्या कर दिहिस।27 फरवरी 1931 मा इलाहाबाद मा"अल्फ्रेड पार्क"हा ब्रिटानी पुलिस के साथ चन्द्र शेखर आजाद ला घेर लिन अउ एखर बीच गोलीबारी होइस अउ आजाद घायल होगे।चन्द्रशेखर आजाद डटके ओखर मुकाबला करिस अउ ओखर बंदूक मा एक गोली बचे रहिस ता सरेंडर करे के बजाय ओ अपन आप ला गोली मार दिहिस।
6-वीर भगत सिंह
आजादी के लड़ाई मा राजगुरू,सुखदेव अउ भगत सिह के बहुत बड़े योगदान हे।8 अप्रैल 1929 के चन्द्रशेखर आजाद के नेतृत्व मा"पब्लिक सेफ्टी" अउ "ट्रेड डिस्प्यूट बिल"के विरोध मा सेन्ट्रल असेंबली मा बम फेके रहिन।ओखर बाद अंग्रेजी सासन हा एमन के गिरफ्तारी ला
चालू कर दिहिस। 24 मार्च 1931 के तीनो ला फाँसी के सजा सुनाए गिस,फेर पूरा देश एखर विरोध मा रहिस अउ जम्मो क्रांतिकारी मन आंदोलन करत रहिन ए जान के एक दिन पहिली अंग्रेजी सासन हा 23 मार्च 1931 के इन मन ला रातो रात फाँसी चढ़ा दिहिन।

7-सरदार उधम सिह
सरदार उधम सिंह के नांव भारत के आजादी बर पंजाब के क्रांतिकारी के रूप मा जाने जाथे13 अप्रैल1919 मा जलियाँवाला बाग हत्याकांड के समय पंजाब के जनरल गवर्नर ला "माइकल ओ हायर" ला लंडन मा जाके ओला गोली मारिस।अंग्रेज मन ओला गिरफ्तार कर "पेंटनमिले जेल मा 23 मार्च 1931 के फाँसी मा चढ़ा दिहिन।


Wednesday, 5 August 2020

मनहरण घनाक्षरी-गुरुदेव

मनहरण घनाक्षरी - आशा आजाद

गुरुदेव

छंद के विद्वान हावै,छंद गुरु कहलावै,
छंद ज्ञान बाँटत हे,सुघर विचार हे।
छंद के कक्षा चलावै,अमरित बगरावै,
छंद गुरुदेव हा जी,हमर अधार हे।
छंद संस्थापक हावै,साधक के मन भावै,
छंद ज्ञान राज बर,नेक उपहार हे।
छंद के गोठ सियानी,हावै बड़ ओ ज्ञानी,
अरुण निगम जी के,नमन सत्कार हे।।

छंदमयी गोष्ठी होवै,जुरमिल ओमा खोवै,
सुरमयी साज ले,मान ला बढ़ात हे।
छंद साधिका के वाणी,हावै सबो जी कल्याणी,
घर बइठे गुरु सबो,उनला सिखात हे।
छंद छंद छाये हवे,ज्ञान गंगा नित बहे,
गुरु शिष्य परंपरा,सबो अपनात हे।
छंद मा छंदाये हावै,साधक के मन भावै,
छंद परिवार के जी,जग गुन गात हे।।

छंदकार - आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

Monday, 3 August 2020

आभार सवैया

 विधान- 8घाव तगण (221×8)
छंद: आभार सवैया

आधार हावै सबो के ग भैया सबो कार्ड राखै बने देय जी ध्यान ।
फोटो खिचाके अँगूठा लगाके ग आधार वाला बताही सबो ज्ञान।
कोनो दिशा मा चले जाव भैया दिलाही बुता गोठ मोरे सही मान।
आधार रोजी दिलावै सुनौ कार्ड राखै उही ला मिले जानलौ धान।

पौधा लगालौ बड़ा नेक हावै इही सांस देवै चलावै सदा जान।
छैया मिले बैठ जावै सबो जी सदा पेड़ छैया ल देवै सुनौ दान।।
देवै सदा शुद्ध हावा सबो ला धुँआ ले बचावै सबो के इही प्रान।
काहे जलाये बिना सोच काटै बचालौ सबो पेड़ दे दौ इही ध्यान।

पौधा लगालौ बड़ा नेक हावै इही सांस देवै चलावै सदा जान।
छैया मिले बैठ जावै सबो जी सदा पेड़ छैया ल देवै सुनौ दान।।
देवै हवा शुद्ध ताजा रखे जी धुँआ ले बचावै सबो के इही प्रान।
काहे जलाये बिना सोच काटै बचालौ सबो पेड़ दे दौ इही ध्यान।

मोद सवैया


विधान- 5घाव भगण+मगण +सगण+गुरु
(211×5)+(222)+(112)+(गुरु)
छंद: मोद सवैया

पाँव पखारत हौ भुइयाँ ममता बसथे बोलै महतारी।
देख हवे नदियाँ कतका दिन रात बहे पानी नित भारी।
खेत म धान बने सब बोवय देवत हे सेवा नर नारी।
धान हवे सबले बढ़िया धन देवत हे मानौ सँगवारी।।

काबर फेंकत हौ पननी सब ध्यान धरौं आगी ल लगादौ।
खावत हे गरवा नइ जानय जान सबो पीड़ा ल मिटादौ।
होवत हे विष पेट मा जी कलपै तड़पै गा जीव बचादौ।
फेंकव साग न भात कभू पननी खतरा हे ये समझादौ।।

जेठ असाढ़ म साँप बिछी कतका नित रेगैं घूमत जावै।
ऊमस कारन बाहिर घूमय देखव पान पताई म लुकावै।
साँप लुकाय कहाँ नइ जानन तेखर ले पनही ला जी बिसावै।
जान बचे सब ध्यान धरौं सब सावन मा रक्षा ल बतावै।।

अरसात सवैया

अरसात सवैया -श्रीमती आशा आजाद

बोट करौ सब ध्यान धरौ सब कीमत जानव चेत लगाव जी।
राज बने सबले बढ़िया अइसे मतदान सबो कर आव जी।
लोभ कभो झन राखव जी धमकाय कभू झन देख डराव जी।
वोट करौ अधिकार मिले सब डालव ये मँय ध्यान धराव जी।

छंदकार - श्रीमती आशा आजाद
पता -मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

मदिरा सवैया

 मदिरा सवैया
(भगण 211×7)+2

शिक्षक दे नित ज्ञान अपार बटावत हे सब ध्यान धरौ।
ज्ञान सिखावत हे सत मारग रेंगव झूठ ल आप डरौ।
विश्व चले गुरु ज्ञान म जी सुविचार रखौ सत भाव भरौं।
ज्ञान ल दान करें गढ़थे गुरु देव सही परनाम करौ।।

मीठ मया समभाव रहे नित प्रेम सबो बगरावव जी।
द्वेष कभू झन राखव जी सत मारग ला अपनावव जी।
क्रोध बड़ा नुकसान करे सब धीर ल आदत डावव जी।
प्रेम रहे हिरदे म सदा समता रस के गुन गावव जी।।

काबर तेज चलावय वाहन बाढ़त हे खतरा जानव जी।
ट्रेफिक रूल ल तोड़य जेमन चोट लगे बड़ मानव जी।
देख हवे जिनगी अनमोल धियान धरौं समझावव जी।
धीर म खीर सुनौ सब मानुष होश म वाहन चलावव

गंगोदक सवैया-माँ

गंगोदक सवैया- आशा आजाद

मान दाई के सबो ले बड़े हे महामाय दानी कहाये सुनौ।
कोख मा नौ माह राखे तभे जीव मुस्कात कोरा म आये सुनौ।
मान सम्मान देवै मया मीठ भाखा सदा माँ सिखाये सुनौ।
प्रेम शिक्षा ला देवै सदा माँ इही ज्ञान गंगा बहाये सुनौ।।

छंदकार - आशा आजाद
मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

महाभुजंग प्रयात सवैया

महाभुजंग प्रयात सवैया - आशा आजाद

करौ मात पूजा इही सान हावै सबो आज आधार माँ हा बनाये।
सबो पाँव छूवौ पखारौ गुनौ काज हावै बड़ा मान जीना सिखाये।
नवा दान देथे इही हा सुनौ मान राखौ मया मा सबो हे बँधाये।
बिना माँ सुखी कोन होही भला जान चारो मुड़ा मा मया हे समाये।

छंदकार - आशा आजाद
मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

वाम सवैया

वाम सवैया - आशा आजाद

कटावत जंगल आज सुनौ सब जीव बड़ा करलावत हावै।
सुखावत हे नदियाँ नरवा बरसा बिन जी अकुलावत जावै।
उजारत जंगल लोभ बड़ा अब पेड़ कहूँ नइ देख लगावै।
बचादव पेड़ लगादव आज प्रदूषण ले सब मुक्ति ल पावै।


वाम सवैया-(7जगण)+(1यगण)
(121×7)+(122)

किसान उठावय नाँगर ला अउ
121 , 121, 121 , 121, 1
जोतय खेत बिना सुसताए
21, 121, 121, 122

उदाहरण-
किसान उठावय नाँगर ला अउ जोतय खेत बिना सुसताए।
कभू बिजरावय घाम कभू अँगरा बरसे तन खून सुखाए।
तभो नइ मानय हार सदा करमा धुन गा मन मा मुसकाए।
असाढ़ घिरे बदरा करिया बरखा बरसे हर पीर भुलाए।।

कटावत जंगल आज सुनौ सब जीव बड़ा करलावत हावै।
सुखावत हे नदियाँ नरवा बरसा बिन जी अकुलावत जावै।
उजारत जंगल लोभ बड़ा अब पेड़ कहूँ नइ देख लगावै।
बचावव पेड़ लगादव आज प्रदूषण ले सब मुक्ति ल पावै।

बड़ा अनमोल हवे सुनलौ जिनगी ल बचावय जानव पानी।
बचालव आज सबो मिलके सबके ग बचावत हे जिंदगानी।
अटावत हे नदिया नरवा बिन पेड़ कहाँ बरसै सुन लेव कहानी।
कहूँ तरसे जल बूँद बिना अब ठानव गा बन जावव दानी।।

बड़ा अनमोल हवे सुनलौ जिनगी ल बचावय जानव पानी।
रखे अपने तन चाम ल कोमल कीमत ला अउ मोल ल जानी।
सहेजत हे मनखे नित प्यास बुझावय ओ कहलावय ज्ञानी।
कहूँ तरसे जल बूँद बिना बच जावय नीर सबो झन ठानी।।

बड़े मनभावन सावन मा महिला सब लोगन तीज मनावै।
लगावत हे सब हाथ म रंग सखी मन आज मुसकावत गावै।
सुहागिन आज सजै बड़ देखव नीक बड़ा सब लागत हावै।
धियान धरै पति नाव रटै सुमिरै वरदान सुहागिन ओ कहलावै।।

बड़ा अनमोल हवे सुनलौ जिनगी ल बचावय जानव पानी।
रखे अपने तन चाम ल कोमल मोल हवे कतका पहचानी।
सहेजत हे मनखे नित प्यास बुझावय ओ कहलावय ज्ञानी।
कहूँ तरसे जल बूँद बिना बच जावय नीर सबो झन ठानी।।

छंदकार - आशा आजाद
कोरबा छत्तीसगढ़

सुमुखी सवैया

 सुमुखी सवैया-(7घाव जगण)+(लघु+गुरु

कटावत हे बड़ पेड़ सुनौ बन जीव सबो मन रोवत हे।
प्रदूषण बाढ़त रोग लगे सबके नित सेहत खोवत हे।
सरकार करै कुछु काज भला चुपचाप इहूँ मन सोवत हे।
लुकावत चोर बने कतका लकरी वन के सब ढोवत हे।।

जवान मरे दिन रात सुनौ कतका सुन सैनिक रोज मरे।
शहीद हुये बड़ देश म जानव दुश्मन ले नइ कोय डरे। चलावत हे दिन रात म जी नित तानय अस्त्र ल देख धरे।
जवान शहीद हुए तव जी लहरावत हे ध्वज आज हरे।।

नवावँव माथ ल आज सबो भारत माँ बर सैनिक रोज मरे।
शहीद हुये बड़ देश म जानव दुश्मन ले नइ कोय डरे। चलावत हे दिन रात न देखय तानय अस्त्र ल देख धरे।
लगावँव भारत माँ जय ला लहरावत हे ध्वज आज हरे।।

सरसी छंद गीत-किसान



सरसी छंद गीत-श्रीमती आशा आजाद

ए भुइयाँ मा देव सही हे,सुनलौ हमर किसान।
भूख प्यास के ये मिटोइयाँ,धरती के भगवान।।

मिहनत करके देवय हमला,भरय अन्न भंडार।
उपजावत हे साग अन्न ला,एखर ले संसार।
घर बइठे हम सेवा पाथन,इही हवय जी सान।
ए भुइयाँ मा देव सही हे,सुनलौ हमर किसान।।

आज बड़ा व्याकुल हे जानौ,दुख हा बड़ तड़पाय।
करजा मा बुड़गे हावय जी,पीरा नही मिटाय।
चुप बइठे सरकार आज तो,तँग खेती ले मान।।
ए भुइयाँ मा देव सही हे,सुनलौ हमर किसान।।

करजा जब अब्बड़ हो जाथे,बेचत हावय खेत।
फाँसी मा झूलत हावय सब,तभो करै नइ चेत।
भूख प्यास ले निसदिन मानौ,छूटत इँखर परान।
ए भुइयाँ मा देव सही हे,सुनलौ हमर किसान।।

काला बेचय काला खाये,नही किसानी मोल।
हरलौ दुख पीरा ला जम्मो,सुनलौ सबके बोल।
सुखी रहय जम्मो किसान मन,दयँ इनला सम्मान।
ए भुइयाँ मा देव सही हे,सुनलौ हमर किसान।।

छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

कुकुभ छंद गीत,भारत के सेच्चे सेनानी

कुकुभ छंद गीत-भारत के सच्चे सेनानी

भारत के सच्चे सेनानी,सबका मान बढ़ाते है,
रण पर कुर्बानी से अपने,झण्डा वो फहराते है।

है शहीद कितने भारत में,कितना रक्त बहाया है,
हिंदुस्तान की शान बान में,मरकर फर्ज निभाया है,
साहस रखकर फर्ज निभाते,दुश्मन मार गिराते है,
रण पर कुर्बानी से अपने,झण्डा वो फहराते है।

घर पर बैठी घरवाली जो,अपना फर्ज निभाती है,
बच्चे उनके नित्य तरसते,पालन श्रेय उठाती है,
हुए वीरगति को सुनकर,अपना होश गवाते है,
रण पर कुर्बानी से अपने,झण्डा वो फहराते है।

जंगल झाड़ी गर्मी सर्दी, तन पर कितना सहते है,
रात रात भर जाग जाग कर,रक्षा सबकी करते है,
हम बैठै है घर पर अपने,सरहद पर सो जाते है,
रण पर कुर्बानी से अपने,झण्डा वो फहराते है।

शत्रु को घुसने ना देते,सीमा पर नजर गड़ाया है,
भूख प्यास का होश कहाँ जब,भारत पर बन आया है,
भारत माता की रक्षा को,लहूँ नेक दे जाते है,
रण पर कुर्बानी से अपने,झण्डा वो फहराते है।

रचनाकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

रोला छंद कोरोना

ला छंद - श्रीमती आशा आजाद

कोरोना हे छाय,देश मा जानौ भाई।
देख वायरस आज,मात गे अब करलाई।।
बिगड़े हे हालात,नास छिन भर मा करथे।
लग जावय ये रोग,कतक मनखे मन मरथे।।

फैलाइस हे रोग,चीन हा देखौ जानौ।
खाइन कच्चा मांस,रोग नावा पहिचानौ।।
फैलत तुरते अंग,हाथ झन जान मिलाहू।
मास्क ल पहिरौ रोज,ज्ञान के बात सिखाहू।।

भीड़ भाड़ ले दूर,रहौ ए सब बर भारी।
जन जन बगरे खूब,वायरस के बीमारी।।
मुँह मा रखौ रुमाल,साथ झन किटानु आये।
बाहिर झन जी जाव,छुवत ये रोग लगाये।।

खाँसी संग जुकाम,हवय जी इही निसानी।
गला करे हे जाम,सांस के बड़ परसानी।।
चमगादड़ अउ सांप,खाय हे चीनी मन जी।
जहर बरोबर आय,बिगड़ गे सबके तन जी।।

शहर शहर अउ गाँव,देश के जम्मो कोना।
कलपत अब्बड़ मान,देख बगरे कोरोना।।
धोवौ अपने हाथ,रोज साबुन ले भैया।
धरलौ करलौ चेत,देश के सबो रहैया।।

घर मा रखहू ध्यान,गरम पानी ला पीहू।
सतर्कता के साथ,ध्यान रखहू ता जीहू।।
करदौ पूरा बंद,चीन के खई खजाना।
बिगड़ जथे हालात,परय पाछु पछताना।

अनुसासन के रोक,आज ये लग गे हावै।
देवै सुघर सुझाव,मनुज घर भीतर जावै।
करथे हित के गोठ,संक्रमित नइ होना हे।
बाहिर ले जब आव,हाथ ला नित धोना हे।।

रोकथाम के काज,करत हे डाक्टर सुनलौ।
कहिथें जेन उपाय,ध्यान धर ओला गुनलौ।।
सर्दी छींक जुकाम,जाँच खाँसी के करहू।
रखके मनखे चेत,स्वस्थ तन मन ला रखहू।

छंदकार - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

छप्पय छंद हमर बस्तर

छप्पय छंद - आशा आजाद

हमर बस्तर

बस्तर के इतिहास,बतावँव मँय हा सुनलौ।
दक्षिण कौशल नाँव,कहाये सुघ्घर गुनलौ।
काकतीय हे वंश,केन्द्र जगदलपुर हावय।
श्रद्धा हवय अपार,सुघर देवालय भावय।
मूल निवासी मन रहे,हल्बा भतरा गोंड़ जी।
हिरदे बसथे प्रेम हा,ओखर नइ हे जोड़ जी।।

झरना के बड़ रूप,गुफा हा अब्बड़ भाये।
बस्तर महल अनूप,देख मन हा मोहाये।
चित्रकूट के धार,दूध कस दिखथे भाई।
दंतेश्वरी कहाय,उहाँ कुलदेवी माई।
महल ऐतिहासिक हवे,चिन्हारी हे राज के।
कलाशिल्प बढ़के उहाँ,सुघ्घर जम्मो काज हे।।

लोक संस्कृति नीक,परंपरा मन ल भावय।
गौर नृत्य के गीत,पुरुष मिल जुलके गावय।
शैला अउ ककसार,सबो हे नाचा सुग्घर।
हल्बी भाखा नीक,कहय कश्मीर ह बस्तर।
हे घाटी कांकेर के,मन होवय आनंद जी।
सुग्घर जंगल मोह लय,मन गाये मकरंद जी।।

छंदकार - आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छग

संशोधित

छप्पय छंद - आशा आजाद

हमर बस्तर

बस्तर के इतिहास,बतावँव मँय हा सुनलौ।
दक्षिण कौशल नाँव,कहाये सुघ्घर गुनलौ।
काकतीय हे वंश,केन्द्र जगदलपुर हावय।
श्रद्धा हवय अपार,इहाँ सुघ्घर देवालय।
मूल निवासी मन रहे,हल्बा भतरा गोंड़ जी।
हिरदे बसथे प्रेम हा,ओखर नइ हे जोड़ जी।।

झरना के बड़ रूप,गुफा हा अब्बड़ भाये।
बस्तर महल अनूप,देख मन हा मोहाये।
चित्रकूट के धार,दूध कस दिखथे भाई।
दंतेश्वरी कहाय,उहाँ कुलदेवी माई।
महल ऐतिहासिक हवे,चिन्हारी हे राज के।
कलाशिल्प बढ़के उहाँ,सुघ्घर जम्मो काज हे।।

लोक संस्कृति नीक,परंपरा मन ल भावय।
गौर नृत्य के गीत,पुरुष मिल जुलके गावय।
शैला अउ ककसार,सबो हे नाचा सुग्घर।
हल्बी भाखा नीक,कहय कश्मीर ह बस्तर।
हे घाटी कांकेर के,मन होवय आनंद जी।
सुग्घर जंगल मोह लय,मन गाये मकरंद जी।।

छंदकार - आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छग

छप्यय छंद तुलसीदास

छप्पय छंद - आशा आजाद

तुलसीदास महान,महाकवि ओ कहलाइन।
दोहा रचके श्रेष्ठ,जगत के मान बढ़ाइन।
जनहित ज्ञान अपार,भक्ति के मारग चलके।
बनगिन साहित दीप,आज अउ सुघ्घर कल के।
रामचरितमानस रचिन,भक्तिभाव के धार ले।
बनिन प्रेरना दीप ओ,सुग्घर जनहित सार ले।।

रामलला हे देन,सतसई सुघ्घर लिखदिस।
हे रामाज्ञा प्रश्न,जानकी मंगल गढ़दिस।
बरवै छप्पय छंद,भाय रोला रामायण।
छंदावली लुभाय,सुघर हे धर्मा निरुपण।
बरवै रामायण लिखिन,रामभक्ति के भाव ले।
संकट मोचन ओ गढ़िन,शिव के मया लगाव ले।।

छंदकार - आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़



मुंशी प्रेमचंद दोहावली

दोहावली - आशा आजाद

मुंशी प्रेमचंद

प्रेमचंद मुंशी हवे,सकल जगत के शान।
सुघर कहानी आज भी,देवय सुघ्घर ज्ञान।।

उपन्यास मा सार हे,दय सुघ्घर संदेश।
अंतस मन निर्मल करे,सबो मिटावय क्लेश।।

अनुपम जम्मो पटकथा,गोठ करय सब पात्र।
पढ़के सबो निबंध ला,खुश होवय सब छात्र।।

नेक विचारक देश के,कहिथे सकल समाज।
तोड़व सबो कुरीति ला,इही रहिस आगाज।।

लिखिस कहानी प्रेरणा,लिखिस पूस के रात।
लागय अइसन पात्र सब,सुघर करत हे बात।।

कर्मभूमि अउ निर्मला,उपन्यास अनमोल।
रंगभूमि गोदान मा,भाव भरे हर बोल।।

विधवा विवाह पथ चलौ,त्यागौ छूआछूत।
तोड़ो दहेज के प्रथा,सच्चा बनौ सपूत।।

नाटक सुघ्घर सृष्टि हे,सचिस सुघर संग्राम।
अदबे अकबर ला लिखिस,हिंदुस्तान के नाम।।

इक्तिफाक ताकत रचिस,लेख लिखिस अनमोल।
ज्ञान सार सुघ्घर गढ़िस,पढ़ मन जावय डोल।।

सैलानी बंदर रचिस,बाल कहानी भाय।
पागल हाथी मस्त हे,पढ़ लइकन मोहाय।।

छंदकार - आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

सरसी छंद गीत

सरसी गीत छंद - श्रीमती आशा आजाद

सुघर तिहार हरेली हावै,मनखे सब मुस्काय।
नेक परब के महिमा अब्बड़,गावै खुशी मनाय।।

जम्मो अपने घर ला लीपय,चमकय सबो दुवार।
खुशी मनावय प्रेम भाव ले,सुग्घर दय व्यवहार।।
गैंती राँपा नाँगर सबला,सुग्घर सब चमकाय।
नेक परब के महिमा अब्बड़,गावै खुशी मनाय।

मीठा गुड़ के गुत्तुर चीला,इही रहय पकवान।
पूजा कुलदेवता के करथे,घर के सबो सियान।।
नाचै गावै खेलै कूदै,अब्बड़ धूम मचाय।
नेक परब के महिमा अब्बड़,गावै खुशी मनाय।

फेंकय नरियर जोर जोर ले,सुग्घर खेलय खेल।
मया बाँटथें सब आपस मा,अंतस मा रख मेल।।
जगा जगा हरियाली रहिथे,मन ला अब्बड़ भाय।
नेक परब के महिमा अब्बड़,गावै खुशी मनाय।

तुलसी के चौंरा हा अब्बड़,सुग्घर रहय लिपाय।
नदियाँ के बँजरी ला लाके,देथे उहाँ बिछाय।।
लइका मन सब गेड़ी चढ़के,खुशी म झूमत जाय।।
नेक परब के महिमा अब्बड़,गावै खुशी मनाय।

गेड़ी चढ़के मजा उड़ावय,रहिथे बड़ आनंद।
खुशहाली मा झूमै गावै,आज किसानी बंद।।
पूजा डोली के सब करथे,सुख मा रहय भुलाय।।
नेक परब के महिमा अब्बड़,गावै खुशी मनाय।

छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर,कोरबा,छत्तीसगढ़

Sunday, 31 May 2020

गीत-सरसी छंद

सरसी छंद गीत

मस्तुरिया जी सान राज के,नेक रहिन इंसान।
मानवता के पाठ पढ़ायिन,सुग्घर जम्मो गान।
(1)
संग चलव रे गीत ल गाके,सुग्घर दिन संदेश।
दीन दुखी के संग चलव रे,कहिन मिटादव क्लेश।
छत्तीसगढ़ म सोना जइसन,नायक के पहिचान।
मस्तुरिया जी सान राज के,नेक रहिन इंसान।

(2)
आशा आस्था उमंग साहस,युवा गीत के बोल।
छत्तीसगढ़ी भाखा सुग्घर,ज्ञान दिहिन अनमोल।
चंदैनी गोंदा मा कह दिन,हवे अधार किसान।
मस्तुरिया जी सान राज के,नेक रहिन इंसान।

(3)
रंगमंच के नायक राहिन,कला रहिस भरमार।
ए भुइयाँ मा हीरा जइसन,बेटा के अवतार।
वर्तमान मा ज्ञान दान हा,हमर हवे अभिमान।
मस्तुरिया जी सान राज के,नेक रहिन इंसान।

(4)
हमर राज के नेक धरोहर,गला म खूब मिठास।
जन ला नित संदेश दिहिन जी,अंतस भर विश्वास।
छत्तीसगढ़ी लेखन धारा,अमिट राज सम्मान।
मस्तुरिया जी सान राज के,नेक रहिन इंसान।

रचनाकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

रोला छंद-किसान

रोला छंद - आशा आजाद

किसान के पीरा

देखौ हमर किसान,देव जम्मो कहिलाथे।
ए भुइयाँ मा आज,काज के गुन ला गाथे।
उपजावै नित अन्न,करय जन सेवा जानौ।
भुइयाँ के भगवान,करम ला जम्मो मानौ।।

करथे मेहनत रोज,घाम ला नित सहिथे जी।
पीरा हवय अपार,दरद ला बड़ रहिथे जी।
दुख के हे भरमार,आज नइ होय गुजारा।
सुनै नही सरकार,खेत हा हवय अधारा।

कलपत आज किसान,खातु बर पइसा नइ हे।
बेचत हावै खेत,अबड़ माते करलइ हे।
देखौ मरत किसान,हवय ओखर दुख भारी।
कइसे बनय अधार,कतक हावै लाचारी।।

लागा करजा खूब,बोझ कइसे ग छुटाही।
रोवत बिलखत रोज,मिलत नइ हे कुछु काही।
चुप्पे हे सरकार,ध्यान नइ अब ता लेवै।
उपजे हावै धान,मोल ओखर नइ देवै।

राखे साहूकार,ब्याज ला नित लेवत हे।
कम देवै जी धान,काट अधिहा देवत हे।
तरसय घर परिवार,मार के मन ला रखथे।
शिक्षा कइसे पाय,ज्ञान ला अबड़ तरसथे।।

सुग्घर खेती होय,बीज अब कति ले आही।
करै सिचाई रोज,सुघर जी पानी चाही।
बिगड़त हे हालात,अन्न अब कम होवत है।
जम्मो आज किसान,अबड़ दुख मा रोवत हे।।

नावा हे तकनीक,लाभ मिलही अब कइसे।
होवत तंग गरीब,चलय घर जइसे तइसे।
सुग्घर करौ उपाय,चैन ला लाना होही।
सुध लेवै सरकार,नही ता नित ओ रोही।

छंदकार - आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़




Tuesday, 5 May 2020

आलेख,कोरोना संकट अउ पर्यावरण

आलेख
कोरोना संकट अउ पर्यावरण

आज कोरोना वायरस ले जनमिस महामारी हा वैश्विक समाज अउ प्रशासन के जम्मो कमजोरी ला उजागर कर दिहिस हे अउ संगे संग ए खतरनाक संकट ले आधू बढ़े के डहर घलो देखाइस हे ।कोविड 19 के ये खतरनाक बीमारी जेन समय के पहिली मनखे के जिनगी मा हावी होगे हावै,अइसन संकट जेन मानव जाति ला क्षिन भर मा नष्ट कर सकत हे ये संकट मानव जिनगी ला आर्थिक विकास,सामाजिक,राजनीतिक जम्मो डहर ले प्रभावित करत जात हे।ते पाय लाकडाउन हा लंबा समय तक अइसनहे बने रहि त दुनिया मा निराशा,तनाव,चिंता जइसन गंभीर मानसिक बीमारी के बाढ़ आ जाही जेन व्यक्तिगत के साथ साथ दुनिया मा सामाजिक, आर्थिक विकास मा बाधा उत्पन्न हो जाही।कोरोना बीमारी के प्रभाव ले कम अउ आर्थिक समस्या के भार ले मानुष के मनोदशा बिगड़ जाही।
ये कोरोना काल विश्व बर एक अइसे संकट हे जेन भविष्य ला सोचे बर मजबूर कर दिये हे, कोरोना वायरस के संक्रमण ले पूरा दुनिया मानो थम से गये हे स्कूल-कॉलेज अउ यात्रा मा पाबंदी, मनखे के एक जगा इकट्ठा होय मा पाबंदी,ए जम्मो पाबंदी ले मनखे कोनो न कोनो रुप मा प्रभावित होत हे। एहा एक बीमारी के खिलाफ बेजोड़ वैश्विक प्रतिक्रिया हे। प्रश्न ये उठत हे के का लाकडाउन हा खतम हो जाही ओखर बाद भी मनखे हा का अपन पुराना दिनचर्या अउ कोरोना के डर ले साधारण जिनगी ला अपना पाही....?
का लाकडाउन ले जेन अर्थव्यवस्था आज मानो थम गये हे ओला भुलाके सुग्घर जिनगी जी पाही..?
दूसर पक्ष मा ए लंबा समय तक अइसे स्थिति बने रही अउ पाबंदी लगे रही त सामाजिक और आर्थिक नुकसान विध्वंसकारी हो जाही। प्रतिबंध समाप्त होय म घलो मानव जिनगी मा ये संकट बरोबर बने रही। संकट ले संक्रमित होय के कारण अनजान मनखे के रोग प्रतिरोधक शक्ति घलो बढ़ सकत हे फेर अइसन होय मा बहुत समय लग सकत हे। एखर लिए हमला सतर्कता के ध्यान रखके हमला दूसर के स्वास्थ्य मा घलो ध्यान देहे ला परही जेखर ले हम ए संकट ले लड़े बर कुछ भागीदारी निभा सकथन।
ये संकट हा अतका जल्दी समाप्त होय के कगार म नइ दिखत हे एखर लिए वैक्सीन बन जाही तभो ले हमला सावधानी अपनाये ल परही,सावधानी ले जिनगी बिताना परही। फेर दू साल तक ए लाकडाउन रही त देश के एक बड़े हिस्सा संक्रमित हो जाही।

विकास के अंधा दउड़ मा भुइँया अउ पर्यावरण के हमन जेन हाल करे हन ओ बीते चार दशक मा चिंता के विषय बने हुए हे फेर विकसित देश अपन जिम्मेदारी निभाये के अलावा विकासशील देश मन बर हावी होवत हे अउ विकासशील देश घलोक विकसित देश मन के डहर मा रेंगत हे अउ पर्यावरण ला नष्ट करत जात हे। पृथ्वी सम्मेलन के 28 साल बाद भी हालात जस के तस रहिस। अइसन लागथे फेर कोरोना महामारी ह विश्व के मनखे मन ला स्वस्थ होय के अवसर दे दिये हे।हवा के जहर कम होगे हावै अउ नदियाँ के जल निर्मल होगे हे।भारत मा जेन गंगा ला साफ करे के अभियान कई साल ले चलत आत हे बीते 5 साल मा लगभग 20000 करोड़ रुपया खर्च करिन हावै तभो ले साधारण सफलता तक नइ दिख पाइस हे। उही गंगा हा लॉकडाउन मा निर्मल बना दिहिस हे।वइसनहे चंडीगढ़ के हिमाचल मा हिमालय के चोटी घलोक दिखे लागे हे । औद्योगिक आय के दर हा जरूर सात फ़ीसदी ले दू फ़ीसदी मा आ गिरीस हे, अर्थव्यवस्था खतरा मा हे,लेकिन इही समय हे के पूरा दुनिया पर्यावरण अउ विकास के संतुलन बर उतके गंभीरता अउ गहराई ले सोचही जतका आज कोरोना संकट ले निपटे के सोचत हावै।

आशा आजाद
मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

Sunday, 26 April 2020

चौपाई छंद

चौपाई छंद - आशा आजाद

छंद दिवस ला आज मनाबो,बछर पाँचवा के गुन गाबो।
शुभदिन देखौ आज कहाये,छंद छंद मा मन ह रमाये।।

छंद छ के मैं बात बतावौं,सुग्घर ओखर गुन ला गावौं।
गुरुगुल ये कक्षा कहलावै,रहि रहि निसदिन गुन ला गावै।।

छंद छ के सब नींव ल जानौ,दो हजार सोलह हे मानौ।
जिला भिलाई के गुन गावै,पहल उहा ले होये हावै।।

छंद ज्ञान गुरु नांव धरौं जी,अरुण निगम के पाँव परौं जी।
हिरदे निरमल बोलै बानी,छंद विधा के ओहे ज्ञानी।।

छंद साधना रोज करै जी,ज्ञान ध्यान अनमोल धरै जी।
साधक मन के गुन हे भारी,छंद ज्ञान हावै हितकारी।।

छंद आनलाइन मा होवै,कक्षा मा सब निसदिन खोवै।
नियम धरम के पालन होथे,सीखय नइ ओ कक्षा खोथे।

छंद म नइ हे लापरवाही,कक्षा ले बाहिर ओ जाही।
होवै गुरुकुल ले उजियारा,साधक मन के हावै प्यारा।।

छंद गीत अउ सुग्घर गोष्ठी,भरथे छंद खजाना कोठी।
जिनिस जिनिस के छंद लिखाये,सबके मन ला अब्बड़ भाये।।

छंद सीखना अब्बड़ भारी,बनथे गुरु सब बारी बारी।
सुग्घर हावै भाईचारा, दीदी भैया इही अधारा।।

छंद हवे छत्तीसगढ़ी ये,पढ़ही सब अगला पीढ़ी ये।
जुग जुग के हवे चिन्हारी,छत्तीसगढ़ ह हे महतारी।।

छंद म सौ साधक मन हावै,रोज अभ्यास कर जँचवावै।
सत्तर अस्सी छंद सिखाये,सुघर व्यवहार गुरु अपनावै।।

छंद भाव मा सबो छंदाये,साधक मन के हिरदे भाये।
अरुण निगम संस्थापक हावै,अपन माथ ला सबो नवावै।।

रचनाकार - आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

Saturday, 25 April 2020

कुकुभ छंद गीत

कुकुभ छंद गीत-श्रीमती आशा आजाद

छत्तीसगढ़ म जनमिस हीरा,वीर नरायण कहलावै।
सच्चा सेनानी ओ राहिन,भारत मा गुन ला गावै।।

अंग्रेज़ी सासन ले जूझिन,अबड़ रहिन जी ओ दानी।
कुर्रूपाट मा जनम लिहिन जी,करिन देश बर अगवानी।।
बिंझवार परिवार के बेटा,आज माथ ला चमकावै।
छत्तीसगढ़ म जनमिस हीरा,वीर नरायण कहलावै।।

नरभक्षी ओ शेर ल मारिन,ओखर पढ़लौ सब गाथा ।
अमर वीर के कुर्बानी ले,भारत के चमकिस माथा।
डरिस नही अंतस मन ले ओ,साहस सबके मन भावै।
छत्तीसगढ़ म जनमिस हीरा,वीर नरायण कहलावै।।

बहादुरी के अब्बड़ किस्सा,देश प्रेम अउ कुर्बानी।
ब्रिटिश राज हा मान बढ़ाइस,पदवी दिन आनी बानी।
जयस्तंभ के चउक म फाँसी,तोप तान के उड़वावै।
छत्तीसगढ़ म जनमिस हीरा,वीर नरायण कहलावै।।

बनिन स्वतंत्रता संग्रामी,याद रही ये बलिदानी।
छत्तीसगढ़ म अमर नाव हे,आज दिवस ला सब मानी।
हिरदे ले परनाम करौ जी,अइसन हीरा नइ आवै।
छत्तीसगढ़ म जनमिस हीरा,वीर नरायण कहलावै।।

छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

Saturday, 18 April 2020

चौपाई छंद छत्तीसगढ़


चौपाई छंद-श्रीमती आशा आजाद

हमर छत्तीसगढ़ राज

सुग्घर छत्तीसगढ़ ल मानौ।एक नंवबर सबझन जानौ।
आज राज के दरजा मिलगे।हमर भाग हा सुग्घर खिलगे।।

छत्तीसगढ़ी गुरतुर बोली।कतक हँसी अउ जान ठिठोली।
ज्ञान बरसथे निशदिन जानौ।कतक विदूषी हावै मानौ।।

झरना झिरिया मंदिर सोहे।मया दया सब मन ला मोहे।।
दक्षिण कौशल राज कहाये।सुग्घर गढ़ छत्तीस समाये।।

जान नागवंशी के बसना।देख इतिहास के सब रचना।
ए भुइयाँ के सुग्घर माटी।केशकाल हे सुग्घर घाटी।।

बिकट चीज के हवे खजाना।उर्जा नगरी राज कहाना।
सोना के भंडार भरे हे।दाई कतका खान धरे हे।।

खनिज संपदा कतका जानौ।सहर कोरबा नामी मानौ।
देवभोग मा सोना दिखथे।लोहा बैलाडिला म मिलथे।।

जान पहाड़ी मैना हावै।राजकीय पक्षी कहलावै।
वनभैसा हे अब्बड़ मिलथे। हमर राज मा गोंदा खिलथे।।

न्यायपालिका सुग्घर हावै।बिलासपुर मा मनखे जावै।
अभ्यारण हा सुग्घर भाये।धान कटोरा राज कहाये।।

का-का गुन ला मँय बतलावौ।छत्तीसगढ़ के महिमा गावौ।
खुशहाली हा जम्मो आये।हमर राज सुग्घर कहलाये।।

लवंगलता सवैया

छंद: लवंगलता सवैया

अनाथ हवे दुख पीर सबो नित मात पिता ल पुकारत हावय।
सतावत हे दिन रात इही उन काबर छोड़ भुलावत जावय।
बिना ममता दिन रात न बीतय ये तरसैं नित रोवय गावय।
सियान हवे नइ तीर म जी भगवान घलो बड़ देख सतावय।।

न्याय कहाँ मिलथे ग कभो हम दीन दुखी मन रोवत हावन।
गरीब सहे कतका दुख झेलय काखर तीर म पीर बतावन।
सबो ठग के नित लूटत हे ग अनाज नही अब जेन ल खावन।
सरकार घलो चुप देखत हे कछु काज करे सुख ला तब पावन।।

चौपाई छंद

चौपाई छंद - श्रीमती आशा आजाद

संविधान के दिन हे आये, शुभ दिन ला सब आज मनाये।
बाबा अम्बेडकर ल जानौ, सब ले बड़का ज्ञानी मानौ।।

जात-पात के भेद मिटाके, सब मनखे ला नित अपनाके।
संविधान ले देश चलावौ, समता के अब भाव जगावौ।।

संविधान भारत के जानौ, कर्म ल अपने सुग्घर जानौ।
मत डारे के हक दिलवाए, मनखे-मनखे गुन ला गाये।।

नारी के सम्मान बढ़े जी, संविधान मा जेन गढ़े जी।
ऊँच-नीच ला झन अपनावौ, भाईचारा मन मा लावौ।।

भीमराव जी राहिन हीरा,दीन हीन के समझिन पीरा।
बाबा बौद्ध धरम अपनाके,पीर हरिन माटी मा जाके।।

संविधान ले सुमता आही, जात पात नइ राहै काही।
सुग्घर भारत अपने होही, शिक्षा के सब बीज ल बोही।।

विश्व म सबले बड़के ज्ञानी, अइसन कर दिन आज सयानी।
हिरदे मा सत्कार भरे हे, भारत के उद्धार करे हे।।

छंदकार - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर, कोरबा छत्तीसगढ़

चौपाई छंद छत्तीसगढ़


चौपाई छंद-श्रीमती आशा आजाद

हमर छत्तीसगढ़ राज

सुग्घर छत्तीसगढ़ ल मानौ।एक नंवबर सबझन जानौ।
आज राज के दरजा मिलगे।हमर भाग हा सुग्घर खिलगे।।

छत्तीसगढ़ी गुरतुर बोली।कतक हँसी अउ जान ठिठोली।
ज्ञान बरसथे निशदिन जानौ।कतक विदूषी हावै मानौ।।

झरना झिरिया मंदिर सोहे।मया दया सब मन ला मोहे।।
दक्षिण कौशल राज कहाये।सुग्घर गढ़ छत्तीस समाये।।

जान नागवंशी के बसना।देख इतिहास के सब रचना।
ए भुइयाँ के सुग्घर माटी।केशकाल हे सुग्घर घाटी।।

बिकट चीज के हवे खजाना।उर्जा नगरी राज कहाना।
सोना के भंडार भरे हे।दाई कतका खान धरे हे।।

खनिज संपदा कतका जानौ।सहर कोरबा नामी मानौ।
देवभोग मा सोना दिखथे।लोहा बैलाडिला म मिलथे।।

जान पहाड़ी मैना हावै।राजकीय पक्षी कहलावै।
वनभैसा हे अब्बड़ मिलथे। हमर राज मा गोंदा खिलथे।।

न्यायपालिका सुग्घर हावै।बिलासपुर मा मनखे जावै।
अभ्यारण हा सुग्घर भाये।धान कटोरा राज कहाये।।

का-का गुन ला मँय बतलावौ।छत्तीसगढ़ के महिमा गावौ।
खुशहाली हा जम्मो आये।हमर राज सुग्घर कहलाये।।

लवंगलता सवैया

छंद: लवंगलता सवैया

अनाथ हवे दुख पीर सबो नित मात पिता ल पुकारत हावय।
सतावत हे दिन रात इही उन काबर छोड़ भुलावत जावय।
बिना ममता दिन रात न बीतय ये तरसैं नित रोवय गावय।
सियान हवे नइ तीर म जी भगवान घलो बड़ देख सतावय।।

न्याय कहाँ मिलथे ग कभो हम दीन दुखी मन रोवत हावन।
गरीब सहे कतका दुख झेलय काखर तीर म पीर बतावन।
सबो ठग के नित लूटत हे ग अनाज नही अब जेन ल खावन।
सरकार घलो चुप देखत हे कछु काज करे सुख ला तब पावन।।

छप्पय छंद

छप्पय छंद-श्रीमती आशा आजाद

(1)प्राथमिक ज्ञान*
पढ़ँलव पहिली पाठ,पाठशाला मा जाके।
बनही जी आधार,पढ़ँव सब सुग्घर गा के।।
खेलव कूदँव रोज,सँग मा भोजन खावौ।
मध्यांतर मा खेल,मजा कर सब घर जावौ।।
पहल प्राथमिक ज्ञान हा,देवँय सुग्घर सार जी।
जिनगी के सुरुवात हे,इही हवे आधार जी।।

(2)सफाई
भारत सुग्घर देश,करौ जी रोज सफाई।
चमचम रखे म सान,आज सबला समझाई।
कूड़ा सबो डलाय,जिहाँ हे कचरा दानी।
देवय जे सहयोग,उही कहरावय ज्ञानी।
परदूषण झन होय जी,इही गोठ मा सार हे।
बड़े बिमारी ले बचौ,सेहत के आधार हे।।

(3)कम्प्यूटर के ज्ञान
कम्प्यूटर के ज्ञान,आज अपनावौ भाई।
जम्मो होथे काज,देश के होत भलाई।।
होवै बुद्धि विकास,देश दुनियाँ के शिक्षा।
आनलाइन भराय,होत जे आज परीक्षा।।
जन-जन के आधार हा,इही म आज रखाय जी।
सबो आकड़ा काम के,छिन मा सब मिल जाय जी।।

(4)पलायन
झन जावव जी छोड़,हमर भारत हे भुइयाँ।
धन के छोड़व लोभ,इहाँ के जनम लेवइया।
सुग्घर आज कमाव,इहाँ सब काही हावै।
ए भुइयाँ ला छोड़,आन देश म झन जावै।।
जनम लिये ये देश मा,कर्म अपन तँय जान ले।
सुग्घर देश के नाव कर,देश धर्म पहिचान ले।।

(5)लोभ मोह
धन के लालच छोड़,धीर ला तँय हा धरले।
मिहनत मा दे ध्यान,नेक तँय रद्दा चुनले।।
होथे धीर म खीर,गोठ ला तँय पतियाले।
धर्म कर्म ला राख,दीन मन ला अपनाले।।
लोभ मोह सब त्याग दे,करथे सबला दूर जी।
मिहनत आही काम सब,जिनगी जी भरपूर जी।।

(6)साफ पानी
पानी पीयव साफ,बिमारी दूर भगाही।
गंदा होही जान,अबड़ ये रोग लगाही।।
डायरिया बड़ होय,जीव ला अपन बचावौ।
कब्ज बढ़े नित मान,जान झन रोग लगावौ।।
स्वस्थ देह बर सीख दव,करय सुरक्षा जान के।
जिनगी सुग्घर बन जही,पानी पी लयँ छान के।।

(7)रोकौ मारपीट
खून खराबा देख,आज कतका हे बढ़गे।
जन-जन बीच म देख,द्वेष मा कतका मरगे।
भाई-भाई के बीच,नही हे भाई चारा।
पइसा के बड़ लोभ,फेर बनथे हत्यारा।
क्रोध भाव हा मान लव,नाता सबला तोड़थे।
प्रेम भाव रद्दा बड़े,इही सबो ला जोड़थे।।

(8) योग करौ
योग करौ जी रोज,बिमारी दूर भगाही।
रोज उठँय सब भोर,पोठ तन आप बनाही।
ओम विलोम म ध्यान,शुद्ध फेफरा ल करही।
रहहूँ स्वस्थ निरोग,योग सब करना परही।।
सेहत हे अनमोल जी,तन ला राखव पोठ जी।
वर्तमान के दउँड़ मा,स्वस्थ रहौ ये गोठ जी।।

(9)वायु प्रदूषण
आज प्रदूषण देख,अबड़ जी रोग लगाथे।
धुँआ के भरमार,इही अंतस घुस जाथे।
करे फेफरा जाम,दमा के पीरा सहिथें।
कैंसर रोग लगाय,चिकित्सक जम्मो कहिथें।
गाड़ी मोटर कोयला,प्लांट प्रदूषण छोड़थे।
धुँआ अबड़ बगरात हे,तन भीतर ले तोड़थे।।

(10)शिक्षा अनमोल
शिक्षा के गुण जान,इही ले हो उजियारा।
एहा चारो धाम,मिटाथे सब अँधियारा।।
कतको विपदा होय,पार लग जाथे नैया।
पढ़े लिखे मा सान,बनालौ अपने छैया।।
शिक्षा आवय काम बड़,ज्ञान हवय अनमोल जी।
शिक्षक बनके ज्ञान दे,शिक्षा के रस घोल जी।।

छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

मदिरा सवैया

 मदिरा सवैया
(भगण 211×7)+2

शिक्षक दे नित ज्ञान अपार बटावत हे सब ध्यान धरौ।
ज्ञान सिखावत हे सत मारग रेंगव झूठ ल आप डरौ।
विश्व चले गुरु ज्ञान म जी सुविचार रखौ सत भाव भरौं।
ज्ञान ल दान करें गढ़थे गुरु देव सही परनाम करौ।।

मीठ मया समभाव रहे नित प्रेम सबो बगरावव जी।
द्वेष कभू झन राखव जी सत मारग ला अपनावव जी।
क्रोध बड़ा नुकसान करे सहना सब आदत डावव जी।
प्रेम रहे हिरदे म सदा समता रस के गुन गावव जी।।

काबर तेज चलावय वाहन बाढ़त हे खतरा जानव जी।
ट्रेफिक रूल ल तोड़य जेमन चोट लगे बड़ मानव जी।
देख हवे जिनगी अनमोल धियान धरौं समझावव जी।
धीर म खीर सुनौ सब मानुष होश म वाहन चलावव

आल्हा छंद

आल्हा छंद - श्रीमती आशा आजाद

कोरोना हे बड़े बीमारी।कहिथे सब कोविड उन्नीस।
बगरावत हे वायरस ल जी।अबड़ महामारी ला दीस।।

चीन देश के ये बीमारी।देश-देश मा बगरिस आज।
लाकडाउन ह होगे हावै।बंद पड़े हे सबके काज।।

नान-नान लइका मन जानै।कोरोना हावै अभिसाप।
घर के भीतर बइठे हावै।सब छोड़िन जी मेल मिलाप।।

भारत के मनखे मन ज्ञानी।जुरमिल मनखे देवै साथ।
ईश्वर ला नित घर मा पूजै।जम्मो टेकत हावै माथ।।

दूर भगे जी ये बीमारी।अनुसासन के रखलौ ध्यान।
पुलिस प्रसासन करे सुरक्षा।हिरदे ले उनला सम्मान।।

डाक्टर के सेवा ला मानौ।देत हवे सब जीवन दान।
मानवता के भाव धरे हे।नर्स सबो मन हवे महान।।

मास्क लगाना जिम्मेदारी।समझौ मनखे नेक सुजान।
एक हाथ के दूरी राखौ।बचही तब मनखे के प्रान।।

अनुसासन के पालन करलौ।धरलौ थोरक मन मा धीर।
लाकडाउन ले मिट जाही जी।बीमारी हावै गंभीर।।

छंदकार - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

Friday, 17 April 2020

कुण्डलिया छंद

 कुण्डलिया छंद

शिक्षक के सम्मान हो,हावै ज्ञानाधार।
निश्छल मन सद्भावना,सत्य प्रेम के सार।।
सत्य प्रेम के सार,ज्ञान के वर्षा करथें।
ज्ञान हवय अनमोल,सदा ये जीवन गढ़थें।।
कह आशा आजाद ,देश के रचथे रक्षक।
विपदा कतको जान,पार लगोइया शिक्षक।

चौपाई छंद

चौपाई छंद

सुग्घर छत्तीसगढ़ ल मानौ ।एक नंवबर सबझन जानौ।
मिलगे दर्जा आज राज के।शान कतक सुन हमर आज के।।

छत्तीसगढ़ी गुरतुर बोली।कतक हँसी अउ जान ठिठोली।
ज्ञान बरसथे निशदिन जानौ।कतक विदूषी हावै मानौ।।

जान छब्बीस मान देश मा।बसथे मनखे कतक भेष मा।
दक्षिण कौशल राज कहाये।सुग्घर गढ़ छत्तीस समाये।।

मिलिस जगा हे नवँवा सुनलौ।कतक हवे आबादी गुनलौ।
देख छत्तीसगढ़ के माटी।केशकाल हे सुग्घर घाटी।

जान नागवंशी के बसना।देखौ सब इतिहास के रचना।
शान कलचुरी के तब सुनलौ।लड़िन ब्रिटिश ले सबझन गुनलौ।

बिकट चीज के हवे खजाना।उर्जा नगरी राज कहाना।
सोना के भंडार भरे हे।दाई कतका खान धरे हे।।

खनिज संपदा कतका जानौ।सहर कोरबा नामी मानौ।
देवभोग मा सोना दिखथे।लोहा बैलाडिला म मिलथे।।

कतक संपदा बाढ़े जानौ।सबो काज के सुविधा मानौ।
झरना झिरिया मंदिर सोहे।मया दया सब मन ला मोहे।।

जान पहाड़ी मैना हावै।राजकीय पक्षी कहलावै।
वनभैसा हे अब्बड़ मिलथे। हमर राज मा गोंदा खिलथे।

न्यायपालिका सुग्घर हावै।बिलासपुर मा मनखे जावै।
अभ्यारण हा सुग्घर भाये।धान कटोरा राज कहाये।

का-का गुन ला मँय बतलावौ।छत्तीसगढ़ के महिमा गावौ।
सुख शांति हा जम्मो आये।हमर राज सुग्घर कहलाये।।

सरसी छंद


*सुनले मोरो गोठ*

पीयत दारू काहे संगी ,सुनले मोरो गोठ।
झन पीबे तयँ दारू संगी,गोठ करो मयँ पोठ।।

कर देथे घर बार नाश जी,हावय ये विषपान।
सुग्घर जीवन जीले मानुष,तन के गुन ला जान।।

दारू हावय जहर बरोबर,नाता सबो छुड़ाय।
घर के विपदा नइ जानय जी,सबला देय भुलाय।।

ठेनी झगरा रोज करय जी,कारन बिन रूलाय।
रद्दा चोरी के धर लेवय ,पइसा लेय लुकाय।।

बिन कारन गारी देवत हे,तयँ अपमान कमाय।
गहना जेवर सब बेचत हे,करके नशा गँवाय।।

रोवत रहिथे घरवाली हा,रोवत लइका जान।
दारू के आदत खराब हे,खो देवय पहिचान।।

संगी मनला अइसन रखबे,रद्दा नेक दिखाय।
सुग्घर जिनगी तयँ जीबे ता,जनम सफल हो जाय।।

नशा नाश के जड़ कहिथे जी,पढ़लव सब ए ज्ञान।
जम्मो रिश्ता खो डरबे तयँ,खो देबे पहिचान।।

रचनाकार-श्रीमति आशा आजाद
पता -एसइसीएल मानिकपुर कोरबा (छ.ग.)

अमृतध्वनि छंद छेरछेरा

छेरछेरा तिहार

संग मनाये देख लव,छेरछेरा ल आज।
सबो बिहनिया जाग के,सब निपटाथे काज।
सब निपटाथे ,काज आज जी,जुर मिल जावै।
छेरछेरा ल,घर-घर घूमत,मांगत जावै।
रोटी पीठा ,बरा सोहारी,मिलजुल खाये।
नाचत कूदत,छेरछेरा ल,संग मनाये।।

अन्न दान के मान हे,इही राज के शान।
पौष माह के आय ले,घर घर निकलय धान।
घर घर निकलय ,धान गुनौ जी,सेवा करथे।
माँग माँग के,लइका जम्मो,झोला भरथे।
घर खुशहाली,छाये रहिथे,इही शान हे।
छत्तीसगढ़ म,बड़ा मान हे,अन्न दान के।

मुर्रा लाई खाय के,बड़ा नियम हे आज,
डंडा नाचा नाचथे,गावयँ सुग्घर साज।
गावय सुग्घर,साज धान ला,सबझन हेरा।
तान लगाके,सबझन बोलय,ग छेर छेरा।
देख मनावय,दान करत हे,जुर मिल भाई।
तिल के लाड़ू,खावय सबझन,मुर्रा लाई।।

सुग्घर सिरजन सब करौ,जग के हो उद्धार।
पढ़के सबझन ज्ञान ले,इही कलम के सार।।
इही कलम के,सार करय जे,नित उजियारा।
सुग्घर कविता,गढ़ देवव जी,लागय प्यारा।।
साहित सिरजन,ज्ञान बढ़ावँय,सीखँय सबझन।
नेक सोच ले,कवि मन रचदयँ,सुग्घर सिरजन।।

छन्न पकैया


*छत्तीसगढ़ी रोटी पीठा*

छन्न पकैया छन्न पकैया,खई खजानी जानौ।
किसम किसम के रोटी पीठा ,हमर राज के मानौ।।

छन्न पकैया छन्न पकैया,लाटा सबला भाये।
गुड़ के सँग अमली डालौ,चाट-चाट सब खाये।।

छन्न पकैया छन्न पकैया,चटनी मा खा चीला।
बेसन के कड़ही सब खालौ,दिखँय पीला पीला।।

छन्न पकैया छन्न पकैया,चाउँर अरसा खालौ।
अब्बड़ गुलगुल मीठा लागँय,गुन ओखर सब गालौ।।

छन्न पकैया छन्न पकैया,अंगाकर ला जानौ।
परसा पाना ले बन जाथे,एखर गुन ला मानौ।।

छन्न पकैया छन्न पकैया,स्वाद फरा के जानौ ।
नून दूध मा एहा बनथे, नून-चूरहा मानौ।।

छन्न पकैया छन्न पकैया,उरिद दार मा बनथे।
बरा सबो ला अब्बड़ भावय,जम्मो ऐला चखथे।।

छन्न पकैया छन्न पकैया, बोरे बासी खालौ।
सुरुट सुरुट सब पीलव पसिया ,मिरचा बुकनी डालौ।।

छन्न पकैया छन्न पकैया,दही मही ला जानौ।
अम्मटहा मा कांदा भावँय,अबड़ मजा मा खालौ।।

छन्न पकैया छन्न पकैया,अरसा रोटी चखलौ।
गुड़ के सँग पाक धरँय जी,हमर राज के करलौ।।

छन्न पकैया छन्न पकैया,इहाँ ठेठरी बनथे ।
बेसन के बन जाथे पातर,ठुठरुम एहा बजथे।।

रचनाकार-श्रीमति आशा आजाद
पता-एसइसीएल मानिकपुर कोरबा( छ.ग)

कुकुभ छंद

कुकुभ छंद

भ्रष्ट नेता

नेता अइसे भ्रष्ट हवय गा,अपन जेब ला भरथे जी।
वोट मांग के नेता बनगे,लोभ मोह बड़ रखथे जी।।

जीत जथे ता नेता मन सब,अपने सेवा ला जानै।
लूटत हावै गरीब मन ला,बात कभू गा नइ मानै।।

मरत हवे कतको किसान मन,दुख हावय ओखर भारी।
लागा करजा मा सब बुड़गे,अइसे हावय लाचारी।।

रोजगार सब खोजत हावय,पढ़ लिख के हावय खाली ।
घूस दिये अउ मिलय नौकरी,ओखर डिग्री हे जाली।।

टूटे घर ला फूटे छानी,सबला कोन बनाही जी।
सरकारी पइसा खा जाथे,देखत रहय तबाही जी।।

जे गरीब के खुलथे खाता,जम्मो पइसा ले जाथे।
मर-मर के जीये गरीब हा,नेता अपने गुन गाथे।।

नेता मनके हवे सुवारथ,अब्बड़ पापी बनगे हे।
कोनो के कछु नइ बिगड़े जी,दुखिया सबो तड़पगे हे।।

खाता सबके खुलगे हावय,पइसा एको नइ हावै।
काटत हावय बैंक देख जी,फोकट चारज कट जावै।।

लोन सबो के खा जाथे सब, दे सरकारी हमला जी।
नजर गड़े हे नेता मनके,होवत हे सब घपला जी।।

नेता मनके भ्रष्ट काम हा,बड़े बिमारी बन गे हे।
राज-काज के लालच मा सुन,सबके माथा तन गे हे।।

कुकुभ छंद

कुकुभ छंद...

नक्सल हमला बंद करौ...

नक्सल हमला बंद करौ जी,सुघ्घर सुमता रखलौ जी।
प्रेम भाव हो बस भारत मा,मानवता ला धरलौ जी।।

बिन कारन सब वीर मरय जी,कतक लहू लुहान होवै।
तड़पत हे लइका मन ओखर,घरवाली बहुते रोवै।।

विपदा हे अब्बड़ सुन ले जी,जेखर सुहाग उजड़े हे।
लइका अनाथ होगे ओखर,रोवत माथा पकड़े हे।।

नक्सल मन सुनलव ए बानी,हाथ जोड़ विनती हावै।
मेल-जोल ला सुग्घर राखव,भाईचारा बढ़ जावै।।

कतका पीरा ला गोहराव,कोन कोन दुख ला बोलौं।
मातम रहिथे छाय देख जी,दिल के दुख कइसे खोलौं।।

रात-रात भर जाग जाग के,करे हमर जी रखवाली।
छोड़ अपन परिवार दूर मा,पेट रहय ओखर खाली।।

हे शहीद भारत के अइसन,झुक जावय सबके माथा।
जुग-जुग तक सहरावत हे जी,गावत हे ओखर गाथा।।

भूख प्यास ला भुला जथे जी,ऐखर कुरबानी जानौ।
सच्चा हावय सपूत देखव,वतन परस्ती ला मानौ।।

Thursday, 16 April 2020

सुमुखी सवैया

सुमुखी सवैया

कटावत हे बड़ पेड़ सुनौ बन जीव सबो मन रोवत हे।
प्रदूषण बाढ़त रोग लगे अपने सब सेहत खोवत हे।
सरकार करै कुछु काज भला चुपचाप इहूँ मन सोवत हे।
लुकावत चोर बने कतका लकरी वन के सब ढोवत हे।।

जवान मरे दिन रात सुनौ कतका सुन सैनिक रोज मरे।
शहीद हुये बड़ देश म जानव दुश्मन ले नइ कोय डरे।
चलावत हे दिन रात म जी नित तानय अस्त्र ल देख धरे।
जवान शहीद हुए तव जी लहरावत हे ध्वज आज हरे।।

नवावँव माथ ल आज सबो भारत माँ बर सैनिक रोज मरे।
शहीद हुये बड़ देश म जानव दुश्मन ले नइ कोय डरे।
चलावत हे दिन रात न देखय तानय अस्त्र ल देख धरे।
लगावँव भारत माँ जय ला लहरावत हे ध्वज आज हरे।।

मोद सवैया

छंद: मोद सवैया

पाँव पखारत हौ भुइयाँ ममता बसथे बोलै महतारी।
देख हवे नदियाँ कतका दिन रात बहे पानी नित भारी।
खेत म धान बने सब बोवय देवत हे सेवा नर नारी।
धान हवे सबले बढ़िया धन देवत हे मानौ सँगवारी।।

काबर फेंकत हौ पननी सब ध्यान धरौं आगी ल लगादौ।
खावत हे गरवा नइ जानय जान सबो पीड़ा ल मिटादौ।
होवत हे विष पेट मा जी कलपै तड़पै गा जीव बचादौ।
फेंकव साग न भात कभू पननी खतरा हे ये समझादौ।।

जेठ असाढ़ म साँप बिछी कतका नित रेगैं घूमत जावै।
ऊमस कारन बाहिर घूमय देखव पान पताई म लुकावै।
साँप लुकाय कहाँ नइ जानन तेखर ले पनही ला जी बिसावै।
जान बचे सब ध्यान धरौं सब सावन मा रक्षा ल बतावै।।

आभार सवैया

 छंद: आभार सवैया

आधार हावै सबो के ग भैया सबो कार्ड राखै बने देय जी ध्यान ।
फोटो खिचाके अँगूठा लगाके ग आधार वाला बताही सबो ज्ञान।
कोनो दिशा मा चले जाव भैया दिलाही बुता गोठ मोरे सही मान।
आधार रोजी दिलावै सुनौ कार्ड राखै उही ला मिले जानलौ धान।

पौधा लगालौ बड़ा नेक हावै इही सांस देवै चलावै सदा जान।
छैया मिले बैठ जावै सबो जी सदा पेड़ छैया ल देवै सुनौ दान।।
देवै सदा शुद्ध हावा सबो ला धुँआ ले बचावै सबो के इही प्रान।
काहे जलाये बिना सोच काटै बचालौ सबो पेड़ दे दौ इही ध्यान।

पौधा लगालौ बड़ा नेक हावै इही सांस देवै चलावै सदा जान।
छैया मिले बैठ जावै सबो जी सदा पेड़ छैया ल देवै सुनौ दान।।
देवै हवा शुद्ध ताजा रखे जी धुँआ ले बचावै सबो के इही प्रान।
काहे जलाये बिना सोच काटै बचालौ सबो पेड़ दे दौ इही ध्यान।

मेरा परिचय

मेरा परिचय

छत्तीसगढ़ राज्य में "छंद के छ" -छत्तीसगढ़ी छंद खजाना ब्लाग पर सम्मिलित मेरी (श्रीमती आशा आजाद) छंदबद्ध रचनाएँ।छंदबद्ध 48-रचनाएँ...
http://chhandkhajana.blogspot.com  देखी जा सकती है।
छत्तीसगढ़ राज्य के छत्तीसगढ़ी छंद ब्लाग में मेरी सारी रचनाएँ इस प्रकार है...
1-http://chhandkhajana.blogspot.com/2018/07/blog-post_72.html
2-http://chhandkhajana.blogspot.com/2019/08/blog-post_16.html
3-http://chhandkhajana.blogspot.com/2019/08/blog-post.html
4-http://chhandkhajana.blogspot.com/2019/07/1_27.html
5-http://chhandkhajana.blogspot.com/2019/07/1-25.html
6-http://chhandkhajana.blogspot.com/2018/10/blog-post_24.html
7-http://chhandkhajana.blogspot.com/2018/11/blog-post.html
8-http://chhandkhajana.blogspot.com/2018/10/blog-post_15.html
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10-http://chhandkhajana.blogspot.com/2018/07/blog-post_13.html
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30-http://chhandkhajana.blogspot.com/2019/12/2019.html?m=1
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39-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/01/blog-post_26.html?m=1
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41-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/02/blog-post_21.html?m=1
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43-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/03/blog-post_4.html?m=1
44-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/03/blog-post.html?m=1
45-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/03/blog-post_94.html?m=1
46-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/03/blog-post_10.html?m=1
47-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/03/blog-post_17.html?m=1
48-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/03/blog-post_22.html?m=1
49-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/04/blog-post_12.html?m=1
50-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/04/blog-post_14.html
51-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/03/blog-post_22.html?m=1
52-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/04/blog-post_27.html?m=1
53-http://chhandkhajana.blogspot.com/2020/05/blog-post.html?m=1
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Wednesday, 1 April 2020

अमृतध्वनि छंद

अमृतध्वनि छंद-श्रीमती आशा आजाद

पोरा तिहार

पोरा सुग्घर मान लौ,हावय हमर तिहार।
कृष्ण पक्ष मा आय जी,रहिथे सुग्घर सार।
रहिथे सुग्घर,सार अबड़ हे,सबझन मानौ।
नँदिया बइला,जोड़ी रहिथे,गुन ला जानौ।
संगी साथी,सब करथे जी,आज अगोरा।
छोट बड़े सब,नोनी बाबू,मानय पोरा।।1 

अँगना घर ला लीपथें,खूब बने पकवान।
छत्तीसगढ़ी ठेठरी,हमर राज के सान।
हमर राज के,सान आज जी,झूमय सबझन।
मिहनत करके ,खूब कमावय,भरथें अन धन।
खुशी मनावय,किंजरय जम्मों,नइ हे बँधना।
मया बरसथे,हँसी ठिठोली,सबके अँगना।।2

चुकिया दीया देख लव,सुग्घर रंग लगाय।
लइका मन सब खेलथे,मनला अब्बड़ भाय।
मनला अब्बड़,भाय रंग मा,जाँता सजथे।
गुलगुल मीठा,अरसा रोटी,अब्बड़ बनथे।
दुख ला हर लौ,झन राहय जी,कोनो दुखिया।
मिल के राहव,घर-घर लावव,दीया चुकिया।।3

छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर, कोरबा,छत्तीसगढ़ 

चौपाई छंद

चौपाई छंद

शरद पूर्णिमा के चंदा

आज शरद पूर्णिमा हे संगी।मउसम देखौ रंग बिरंगी।
चंदा देखौ अब्बड़ चमके।अंतस मन हा सबके दमके।।

नाव कौमुदी व्रत कहलाये।देख शुक्लपक्ष मा हे आये।
चमकय देखौ चंदा भारी।किरन होय आजे शुभकारी।।

जन्मे लक्ष्मी आजे सुनलौ।मनोकामना ला सब गुनलौ।
व्रत होथे लइका के आजे।शुभ बेरा मा बाजा बाजे।।

नोनी आजे व्रत जे रहिथे।मिलथे सुग्घर वर सब कहिथे।
रोग दूर हो जाये सुनले।आज शरद दिन ला तँय गुनले।।

आज जागरन जम्मो करथे।हिरदे ला सब निर्मल रखथे।
रोग असाध्य सबो मिट जाथे।आज सुनौ दिन शुभ कहाथे।। 

खुशहाली जी आजे आथे।दिन अइसन सुन आज कहाथे।
निर्मल मन तन सबके होवै।रोग असाध्य आजे खोवै।।

चंदा के मुख अब्बड़ भाये।ओला देखे बर सकलाये।
बारत हावै दीया बाती।शुभ बीते जी दिन अ

छन्न पकैया छंद

छत्तीसगढ़ी रोटी पीठा

छन्न पकैया छन्न पकैया, छत्तीसगढ़ी जानौ।
किसम किसम के रोटी पीठा ,सुग्घर एला मानौ।। 

छन्न पकैया छन्न पकैया,लाटा अब्बड़ भाये।
गुड़ के संगे अमली डालौ,चाट-चाट सब खाये।। 

छन्न पकैया छन्न पकैया,चटनी मा खा चीला।
बेसन के कड़ही तयँ खाले,दिखँय पीला पीला।। 

छन्न पकैया छन्न पकैया,चाउँर अरसा खाले।
अब्बड़ गुलगुल मीठा लागँय,गुन ओखर तँँय गाले।।

छन्न पकैया छन्न पकैया,अंगाकर ला जानौ।
परसा पाना ले बन जाथे,एखर गुन ला मानौ।।

छन्न पकैया छन्न पकैया,स्वाद फरा के जानौ ।
नून दूध मा एहा बनथे, नून-चूरहा मानौ।।

छन्न पकैया छन्न पकैया,उरिद दार मा बनथे।
बरा सबो ला अब्बड़ भावय,जम्मो ऐला चखथे।। 

छन्न पकैया छन्न पकैया, बोरे बासी खाले।
सुरुट सुरुट तयँ पीले पानी ,मिरचा चटनी डाले।।

छन्न पकैया छन्न पकैया,दही मही ला जानव।
जिमी कांदा अम्मटहा म,अबड़ मजा मा खालव।। 

रचनाकार-श्रीमति आशा आजाद
पता-एसइसीएल मानिकपुर कोरबा( छ.ग)

अमृतध्वनि छंद

अमृतध्वनि छंद

छेरछेरा तिहार
संग मनाये देख लव,छेरछेरा ल आज।
सबो बिहनिया जाग के,सब निपटाथे काज।
सब निपटाथे ,काज आज जी,जुर मिल जावै।
छेरछेरा ल,घर-घर घूमत,मांगत जावै।
रोटी पीठा ,बरा सोहारी,मिलजुल खाये।
नाचत कूदत,छेरछेरा ल,संग मनाये।। 

अन्न दान के मान हे,इही राज के शान।
पौष माह के आय ले,घर घर निकलय धान।
घर घर निकलय ,धान सबो झन, पूजा करथे।
माँग माँग के,लइका जम्मो,झोला भरथे।
घर खुशहाली,छाये रहिथे,इही शान हे।
छत्तीसगढ़ म,बड़ा मान हे,अन्न दान के।
मुर्रा लाई खाय के,बड़ा नियम हे आज।

डंडा नाचा नाचथे,राखय एके साज।
राखय एके,साज धान सब,कोठी हेरा।
तान लगाके सबझन बोलय,ग छेर छेरा।
देख मनावय,दान करत हे,जुर मिल भाई।
तिल के लाड़ू,खावय अउ सुन,मुर्रा लाई।।

वाम सवैया

वाम सवैया-श्रीमती आशा आजाद 

बड़ा मनभावन लागत हे बहिनी मनहा सब तीज मनावै।
लगावत हे सब हाथ म रंग सखी मिलके मुसकावत गावै।
सुहागिन आज सजै बड़ देखव नीक सुहावन लागत हावै।
धियान धरै पति नाव रटै सुमिरै ग सुहागिन ओ कहलावै।।

बलावत हे सब तीज तिहार म भात खवाय बड़ा मन भाथे।
सबो झन प्रेम ल राखय आज सुहागिन गीत ल सुग्घर गाथे।।
अपार खुशी मइलोगन के दिन रात रखे उपवास सुहाथे।
बिहान म ये फरहार करे हर साल तिहार मया बरसाथे।।

सार छंद गीत

सार छंद गीत-श्रीमती आशा आजाद

समता हिरदे बस जाये जी,भाईचारा लावौ।
समरसता के भाव रहै जी,उजियारा बगरावौ।।

मनखे मनखे एक रहय जी,गुनलौ सुग्घर बानी।
गुरुघासीदास बबा हा जी,अबड़ राहीन ज्ञानी।
छूआछूत ला दूर भगाके,सबझन मन दमकावौ।
समता जग मा बगरावौ जी,भाईचारा लावौ।।

बाबा अम्बेडकर ह बोलिन,जात पात ला भूलौ।
सुग्घर जम्मो काज करौ जी,मन ले मन ला छूलौ।
मनुज रक्त हा एक हवे जी,मानवता अपनावौ।
समता जग मा बगरावौ जी,भाईचारा लावौ।।

गाँधी जी के नेक वचन ला,सबझन सुग्घर मानौ।
झूठ लबारी गोठ त्याग के,नेक करम पहिचानौ।
भेदभाव ला तोड़ौं जम्मो,झरखा द्वेष मिटावौ।
समता जग मा बगरावौ जी,भाईचारा लावौ।।

इँदिरा गाँधी ज्ञान देत हे,नारी साहस धरलौ।
अनाचार ले जुरमिल लड़हूँ,तन लोहा कस रखलौ।
शिक्षा के अनमोल रतन ले,जन जन मा फैलावौ।
समता जग मा बगरावौ जी,भाईचारा लावौ।।

झाँसी के रानी के हिम्मत,सबला ये सिखलाथे।
मुसकिल होवै कतको भारी,दुनियाँ ले लड़ जाथे।
अंतस हिरदे जोश जगाके,कमजोरी ल भगावौ।
समता जग मा बगरावौ जी,भाईचारा लावौ।।

छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर, कोरबा छत्तीसगढ़

रोला छंद

रोला छंद - श्रीमती आशा आजाद

कोरोना हे छाय,देश मा जानौ भाई।
देख वायरस आज,मात गे अब करलाई।।
बिगड़े हे हालात,नास छिन भर मा करथे।
लग जावय ये रोग,कतक मनखे मन मरथे।।

फैलाइस हे रोग,चीन हा देखौ जानौ।
खाइन कच्चा मांस,रोग नावा पहिचानौ।।
फैलत तुरते अंग,हाथ झन जान मिलाहू।
मास्क ल पहिरौ रोज,ज्ञान के बात सिखाहू।।

भीड़ भड़क्का छोड़,हवय अबड़ महामारी।
जन जन बगरे खूब,वायरस के बीमारी।।
मुँह मा रखौ रुमाल,साथ झन किटानु आये।
बाहिर झन जी जाव,छुवत ये रोग लगाये।।

खाँसी संग जुकाम,हवय जी इही निसानी।
गला करे हे जाम,सांस के बड़ परसानी।।
चमगादड़ अउ सांप,खाय हे चीनी मन जी।
जहर बरोबर मान,बिगड़ गे सबके तन जी।।

शहर शहर अउ गाँव,देश के जम्मो कोना।
कलपत अब्बड़ मान,देख बगरे कोरोना।।
धोवौ अपने हाथ,रोज साबुन ले भैया।
धरलौ करलौ चेत,देश के सबो रहैया।।

लहसुन सुघर उपाय,गरम पानी ला पीहू।
हल्दी तुलसी काट,सुघर एखर ले जीहू।।
करदौ पूरा बंद,चीन के खई खजाना।
बिगड़ जथे हालात,परय पाछु पछताना।

रोकथाम के काज,करत हे डाक्टर सुनलौ।
कहिथें जेन उपाय,ध्यान धर ओला गुनलौ।।
सर्दी छींक जुकाम,जाँच खाँसी के करहू।
रखके मनखे चेत,स्वस्थ तन मन ला रखहू।

छंदकार - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

छप्पय छंद - श्रीमती आशा आजाद

कोरोना के रोग,छाय अबड़ महामारी।
बिगड़े हे हालात,वायरस के बीमारी।।
देवय तन ल बिगाड़,बात ला मानौ भैया।
रखहू सबझन ध्यान,देश के सबो रहैया।।
खाँसी छींक जुकाम हो,जाँच करे मा ध्यान दौ।
छुवत बढ़य जी रोग हा,सबला सुग्घर ज्ञान दौ।।

मुँह मा रखौ रुमाल,मास्क ला पहिरौ भाई।
फइल जही नित जान,मातही तब करलाई।।
वायरस के प्रकोप,रात दिन बाढ़ै जानौ।
बाहिर झन जी जाव,गोठ डाक्टर के मानौ।।
हाथ मिलाके सब सुनौ,धोवव अपने हाथ जी।
रोज सावधानी रखौ,घूमौ झन नित साथ जी।

छंदकार - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

मनहरण घनाक्षरी - श्रीमती आशा आजाद

कोरोना हा बगरत हे,मानुष हा तड़पत हे
महामारी नित बाढ़ै,किटानु फैलात हे
वायरस कहिथे जी,दरद ला सहिथें जी
अंतस मा घुस के जी,बीमारी बगरात हे
चीनी मन के देन हावै,चमगादड़ सांप खावै,
सोचे नइ समझे जी ,मांस कच्चा खात हे
देश के जम्मो कोनो,बगरे हे ये कोरोना,
सावधानी राखे मा जी,रोग कट जात हे।

गरम सब पीयौ पानी,झन करौ मनमानी
सांस बड़ परसानी,लेवत हे प्रान ला





Friday, 27 March 2020

चौपाई छंद

चौपाई छंद - श्रीमती आशा आजाद

जय हो हे भोला भंडारी।तँय ता सबके पालन हारी।
बाढ़े अत्याचार मिटादे।नारी के तँय मान बचादे।।

सरग लोक मा बइठे भोला।पाप म जलगे नारी चोला।
अंधकार ले नोनी रोवै।मान अपन ओ निसदिन खोवै।।

रिश्ता नाता सबो भुलागे।मानुष तन ये आज रुलागे।
अपन कोख मा राखै नारी।समझय नइ गा अतियाचारी।।

जगा जगा हे छुपे लुटेरा।नारी राखै कहाँ बसेरा।
अवतारी बनके तँय आजा।नारी के अब लाज बचाजा।।

कोन डहर अब मान बचावै।कोन जगा गोहार लगावै।
न्याय कहाँ अब मिलही बोलौ।तीसर आँखी अब ता खोलौ।।

तँय ता चुप्पे देखत ठाढ़े।ये भुइयाँ मा पापी बाढ़े।
कबतक तँय पूजा करवाबे।पापी ला कब मार गिराबे।।

भोले तँय अब डमरु बजादे।आज मान के दीप जलादे।
सुख ले राहय जम्मो नारी।सुख के तही हवस अधिकारी।।

आशा बेटी सुमिरय तोला।कलजुग मा तँय आजा भोला।
प्रेम सम्मान सुमता लादे।ये भुइयाँ मा प्रेम बढ़ादे।।

छंदकार - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

विष्णुपद छंद गीत

विष्णु पद छंद गीत-श्रीमती आशा आजाद

पढ़ना लिखना सीखौ संगी,ज्ञान ध्यान धरलौ।
अंधकार ला दूर करौ जी,चेत सबो करलौ।।

हवे तकनीक आनी बानी,सुग्घर ध्यान धरौ,
ज्ञान बढ़ावत कम्प्यूटर हा,नित सब चेत करौ,
जिनिस जिनिस मा ज्ञान धरे हे,सब सुग्घर पढ़लौ,
अंधकार ला दूर करौ जी,चेत सबो करलौ।।

बन जावौ डाक्टर पढ़ लिख के,तन ला ठीक करे।
तन बीमारी दूर भगावै,शिक्षा सकल धरे।
शिक्षक बनके ज्ञान बाँटबो,प्रन करके बढ़लौ।
अंधकार ला दूर करौ जी,चेत सबो करलौ।।

शोध करौ आनी बानी के,अब्बड़ विषय भरे,
शिक्षा बर नित काज करौ जी,जग उत्थान करे,
नवा अँजोर करदव अइसे,जनहित ज्ञान गढ़लौ,
अंधकार ला दूर करौ जी,चेत सबो करलौ।।

छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

शंकर छंद


शंकर छंद-श्रीमती आशा आजाद

मस्तुरिया जी सान राज के,हमर हे अभिमान।
सुग्घर जन उद्धार करिन जी,गीत के रसखान।।
जन जन ला संदेश दिहिन जी,नेक अमरित बोल।
ए भुइयाँ के हीरा हावै,कर्म हे अनमोल।।

संग चलव रे गीत ल गाके,दिहिन जी संदेश।
दीन दुखी के संग चलव रे,मिटे जम्मो क्लेश।।
छत्तीसगढ़ म सोना जइसे,अमिट हे पहिचान।
मस्तुरिया जी अंतस मन ले,नेक निक इंसान।।

आशा आस्था उमंग साहस,युवा गीत ह बोल।
छत्तीसगढ़ी भाखा बोलिन,ज्ञान बड़ अनमोल।।
चंदैनी गोंदा मा कह दिन,हे अधार किसान।
मस्तुरिया जी प्रेम भाव के,रचिन गीत सुजान।।

गिरे थके के रहिन सहारा,कला के भरमार।
धन्य भाग ए भुइयाँ के जी,मिलिस ये अवतार।।
छत्तीसगढ़ी ला पोठ बनाके,बनिन हे अभिमान।
मस्तुरिया जी लाइन सुमता,सुघर लेखन ज्ञान।।

हमर राज के नेक धरोहर,कंठ मधुर मिठास।
जन जन मनखे मन मा भरदिन,अंतस म विश्वास।।
छत्तीसगढ़ी लेखन धारा,अमिट हे सम्मान।
मस्तुरिया जी हिरदे बसके,अपन छोड़िन प्रान।।

छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

सार छंद गीत

सार छंद - श्रीमती आशा आजाद

सुग्घर होली खेलव

आगे हाँसत धरके ऐदे,रंग भरे जी होली।
रंग भरे पिचकारी लेलौ,आवव रे हमजोली।।

छेड़ौ सबझन साज नगाड़ा,गावौ मिल जुल गाना।
बिछे रहय रंगोली जइसन,मउसम लगय सुहाना।
गुत्तुर-गुत्तुर भाखा राखौ,बोलौ सुग्घर बोली।
रंग भरे पिचकारी लेलौ,आवव रे हमजोली।।

हरिहर हरिहर रंग रहय जी,नीला पीला डालौ।
ढोल नगाड़ा बाजा बाजै,गीत मया के गालौ।
तान लगाके सब झन बोलौ,होली हे जी होली।।
रंग भरे पिचकारी लेलौ,आवव रे हमजोली।।

होली हे भाई होली हे,तान लगाके घूमौ।
रंग बिरंगी ए भुइयाँ ला,माथ नवा के चूमौ।।
संगी साथी साथ रहय जी,होवै हँसी ठिठोली।
रंग भरे पिचकारी लेलव,आवौ रे हमजोली।।

छंदकार - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़


छप्पय छंद

छप्पय छंद श्रीमती आशा आजाद

होली आगे देख,सबो संगी जुरियावौ।
छेड़ नगाड़ा साज,थिरक के गाना गावौ।।
अपने धुन के साज,तान ला छेड़ँव संगी।
भुइयाँ दिखही आज,बने जी रंग बिरंगी।।
बने मजा के खेल लौ,ठेनी झगड़ा छोड़ दौ।
मया पिरित के रंग ले,जम्मो नाता जोड़ दौ।।

सुमता के हो रंग,रंग अइसन बगरावौ।
मया पिरित के बोल,गीत ला जुरमिल गावौ।।
बैरी संगी होय,नेक व्यवहार ल रखहूँ।
नसा नास हे जान,मात के झन जी रहहूँ।।
जात पात ला भूलके,भाईचारा लाव जी।
संग मया ला बाट के,हिरदे ले मुस्काव जी।।

छंदकार - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

कुकुभ छंद


कुकुभ छंद-श्रीमती आशा आजाद

अम्बेडकर जयंती

चलँव मनाइन जन्मदिवस ला, शुभ दिन देखौ आये हे।
भीम रंग मा डूबिन सबझन,खुशी गीत ला गाये हे।।

बाबा के बानी हे सुग्घर,समता हमला सिखलावै।
रद्दा सत के देखाइस हे,सत मारग ला बतलावै ।।

बाबा के कुर्बानी अइसन, सुग्घर आज बनाये हे।
शिक्षित होके दय प्रकाश ला,कतका नाम कमाये हे।।।

प्रेम भाव समरसता बरसय,शिक्षित बनौ सिखाये हे।
खुदे अकेला कठिन राह मा,रद्दा नवा दिखाये हे।।

जात पात ले ऊपर लाइस,नेक करम ला जानौ जी ।
छूत भाव ले मुक्त कराइस,ओखर गुन ला मानौ जी।।

भीमराव की बेटी हावँव,जानँव अपने हक लेना ।
नारा हे संघर्ष करौ के, साथ भीम के हे सेना।।

शान बान सब तोरे दम ले, बाबा तँय हा दिलवाये ।
झूम उठिन हे जन्मदिवस मा, भीम रंग हे लहराये।।

शिक्षा के अनमोल रतन ले,कर लौ सब उजियारा जी। विपदा मा सुन पार लगाही,हटही दूर अंधियारा जी।।

रचनाकार-श्रीमती आशा आजाद
पता -मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

रोला छंद

रोला छंद - श्रीमती आशा आजाद

कोरोना हे छाय,देश मा जानौ भाई।
देख वायरस आज,मात गे अब करलाई।।
बिगड़े हे हालात,नास छिन भर मा करथे।
लग जावय ये रोग,कतक मनखे मन मरथे।।

फैलाइस हे रोग,चीन हा देखौ जानौ।
खाइन कच्चा मांस,रोग नावा पहिचानौ।।
फैलत तुरते अंग,हाथ झन जान मिलाहू।
मास्क ल पहिरौ रोज,ज्ञान के बात सिखाहू।।

भीड़ भड़क्का छोड़,हवय अबड़ महामारी।
जन जन बगरे खूब,वायरस के बीमारी।।
मुँह मा रखौ रुमाल,साथ झन किटानु आये।
बाहिर झन जी जाव,छुवत ये रोग लगाये।।

खाँसी संग जुकाम,हवय जी इही निसानी।
गला करे हे जाम,सांस के बड़ परसानी।।
चमगादड़ अउ सांप,खाय हे चीनी मन जी।
जहर बरोबर मान,बिगड़ गे सबके तन जी।।

शहर शहर अउ गाँव,देश के जम्मो कोना।
कलपत अब्बड़ मान,देख बगरे कोरोना।।
धोवौ अपने हाथ,रोज साबुन ले भैया।
धरलौ करलौ चेत,देश के सबो रहैया।।

लहसुन सुघर उपाय,गरम पानी ला पीहू।
हल्दी तुलसी काट,सुघर एखर ले जीहू।।
करदौ पूरा बंद,चीन के खई खजाना।
बिगड़ जथे हालात,परय पाछु पछताना।

रोकथाम के काज,करत हे डाक्टर सुनलौ।
कहिथें जेन उपाय,ध्यान धर ओला गुनलौ।।
सर्दी छींक जुकाम,जाँच खाँसी के करहू।
रखके मनखे चेत,स्वस्थ तन मन ला रखहू।

छंदकार - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

छप्पय छंद - श्रीमती आशा आजाद

कोरोना के रोग,छाय अबड़ महामारी।
बिगड़े हे हालात,वायरस के बीमारी।।
देवय तन ल बिगाड़,बात ला मानौ भैया।
रखहू सबझन ध्यान,देश के सबो रहैया।।
खाँसी छींक जुकाम हो,जाँच करे मा ध्यान दौ।
छुवत बढ़य जी रोग हा,सबला सुग्घर ज्ञान दौ।।

मुँह मा रखौ रुमाल,मास्क ला पहिरौ भाई।
फइल जही नित जान,मातही तब करलाई।।
वायरस के प्रकोप,रात दिन बाढ़ै जानौ।
बाहिर झन जी जाव,गोठ डाक्टर के मानौ।।
हाथ मिलाके सब सुनौ,धोवव अपने हाथ जी।
रोज सावधानी रखौ,घूमौ झन नित साथ जी।

छंदकार - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

मनहरण घनाक्षरी - श्रीमती आशा आजाद

कोरोना हा बगरत हे,मानुष हा तड़पत हे
महामारी नित बाढ़ै,किटानु फैलात हे
वायरस कहिथे जी,दरद ला सहिथें जी
अंतस मा घुस के जी,बीमारी बगरात हे
चीनी मन के देन हावै,चमगादड़ सांप खावै,
सोचे नइ समझे जी ,मांस कच्चा खात हे
देश के जम्मो कोनो,बगरे हे ये कोरोना,
सावधानी राखे मा जी,रोग कट जात हे।

गरम सब पीयौ पानी,झन करौ मनमानी
सांस बड़ परसानी,लेवत हे प्रान ला





Wednesday, 4 March 2020

शंकर छंद


शंकर छंद-श्रीमती आशा आजाद

मस्तुरिया जी सान राज के,इही हमर अभिमान,
सुग्घर जन उद्धार करिन जी,हे भुइयाँ के सान।
जन जन ला संदेश दिहिन जी,अमरित कस हे बोल,
ए भुइयाँ के हीरा हावै,बानी सब अनमोल।।

संग चलव रे गीत ल गाके,सुग्घर दिन संदेश।
दीन दुखी के संग चलव रे,कहिन मिटादव क्लेश।
छत्तीसगढ़ म सोना जइसन,नायक के पहिचान।
मस्तुरिया जी अंतस मन ले,नेक रहिन इंसान।।

आशा आस्था उमंग साहस,युवा गीत के बोल।
छत्तीसगढ़ी भाखा सुग्घर,ज्ञान दिहिन अनमोल।
चंदैनी गोंदा मा कह दिन,हवे अधार किसान।
मस्तुरिया जी प्रेम भाव के,रचदिन गीत सुजान।।

रंगमंच के नायक राहिन,कला रहिस भरमार।
ए भुइयाँ मा हीरा जइसन,बेटा के अवतार।
छत्तीसगढ़ी ला पोठ बनाके,बनिन हमर अभिमान।
मस्तुरिया जी लाइन सुमता,लेखन मा नित ज्ञान।।

हमर राज के नेक धरोहर,गला म खूब मिठास।
जन ला नित संदेश दिहिन जी,अंतस भर विश्वास।
छत्तीसगढ़ी लेखन धारा,अमिट राज सम्मान।
मस्तुरिया जी हिरदे बसके,छोड़िन अपने प्रान।।

छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

सरसी छंद गीत

सरसी छंद गीत-श्रीमती आशा आजाद

अंतस हिरदे तही समाये,ए मनबँधना मोर,
कोनो रद्दा रेगौं जोही,सुरता आथे तोर।

रहि रहि आये तोरे सुरता,कलपत हावौ मान,
मया पिरित के अइसन बँधना,अब्बड़ पीरा जान,
चर्चा होगे बीच गाँव मा,गली गली अउ खोर,
कोनो रद्दा रेगौं जोही,सुरता आथे तोर।

भूख पियास ल सबो भुलाये,होय अकेला आज,
सुध बुध मँय बिसराये जोही,अब ता आवै लाज,
घर ले बाहिर तोर नांव के,होवत अब्बड़ सोर,
कोनो रद्दा रेगौं जोही,सुरता आथे तोर।।

ले आ अब बारात दुवारी,अतके हावै आस,
नैन अगोरत आबे जल्दी,राखे हँव विश्वास,
बैरी झन तँय होबे संगी,विनती हे कर जोर,
कोनो रद्दा रेगौं जोही,सुरता आथे तोर।।

मोर करेजा ला कर चानी,झन तड़पाबे देख।
भाग लिखाये तोर संग मा,इही करम के लेख,
तोर नाव के चूरी पहिरौ,जिनगी हो अंजोर,
कोनो रद्दा रेंगौ जोही,सुरता आथे तोर।।

छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़



Sunday, 2 February 2020

बरवै छंद

बरवै छंद - श्रीमती आशा आजाद

आज हरेली हावय,देख तिहार।
घर ला लीपय चमके,सबो दुवार।।

गैंती राँपा नाँगर,सब चमकाय।
पूजा करथें सबझन,ध्यान लगाय।।

मीठा गुड़ अउ चीला,के पकवान।
पूजा कुलदेवता के,करे सियान।।

फेंकय नरियर हावय,सुग्घर खेल।
मया बाँट आपस मा,रखथें मेल।।

तुलसी के चौंरा हा,देख लिपाय।
नदियाँ के बँजरी ला,हे बिछाय।।

गेड़ी चढ़के लेवय,बड़ आनंद।
आज किसानी ला सब,रखथे बंद।।

पूजा डोली के जी,करे किसान।
सुग्घर उपजय सुमिरय,सबके धान।।

जगा जगा हरियाली,मन ला भाय।
नेक परब ला मिल जुल,आज मनाय।।

नाचै गावै मनखे,धूम मचाय।
लइका गेड़ी चढ़के,बड़ हरसाय।।

खोंचय लिम के डारा,घर घर जान।
दूर बिमारी करथे,कहय सियान।।

हमर छत्तीसगढ़ के,ये आधार।
खुशी मनावय सुग्घर,दय व्यवहार।।

प्रेम बरसते कतका,मीठा भाव।
हमर छत्तीसगढ़ ला,माथ नवाव।।

छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर,कोरबा,छत्तीसगढ़

दोहा मुक्तक

दोहा मुक्तक - श्रीमती आशा आजाद

मकर संक्रांति आय हे,जुरमिल जावौ आज,
बड़े बिहनिया स्नान कर,करदौ दान अनाज,
शुभ मंगल के दिन हवे,जम्मो कहय सियान,
अरपन जल ला जे करे,पूरा होथे काज।।

तिलकुट बनथे आज जी,गुण के सब पकवान।
मीठा तिल के लाड़ू जी,अबड़ बने मिष्ठान,
पतंगबाजी सब करे,खुशी मनावत संग,
आज अबड़ जी सान ले,दयँ गुड़ तिल के दान ।।

रहिथे अब्बड़ स्वाद जी,मूँगफली गुड़ के संग,
चारो कोती मखर के,छाये रहिथे रंग,
नवा फसल बर देव ला,सुमिरय बारंबार,
रंग बिरंगा देख लव,उड़थे सुघर पतंग।

नेपाली मनखे कहे,सुरुज मकर के सार,
कहय पंजाब लोहड़ी,माघी हे संस्कार,
तमिलनाडु कहिथे सुघर,पोंगल हावै नाम,
सुग्घर खिचरी राँध के,बाटय प्रेम अपार।।

सुरुज देव किरपा करौ,इही करय गोहार,
सुग्घर घर परिवार मा,सबके हो उद्धार,
सबझन बाँटय आज तो,मीठा गुड़ पकवान,
खुशियाँ सबला बाँट के,दयँ सुग्घर व्यवहार।।

छंद - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़




कुण्डलिया छंद

कुण्डलिया छंद - श्रीमती आशा आजाद

(1)
जिनगी के दिन चार हे,हाँसत खेल गुजार।
ठेनी झगरा छोड़ दे,जिनगी अपन सुधार।।
जिनगी अपन सुधार,नेक तँय मारग चुनले।
भेदभाव ला छोड़,मया ला हिरदे रखले।।
दुख-सुख संगे बाँट,रहय झन बैरी संगी।
मिलके रहिबो साथ,होय जी सुग्घर जिनगी।।
(2)
मँय नारी अवतार हो,जग मा हे पहिचान।
सरी जगत मा मान हे,देत हवय सम्मान।।
देत हवय सम्मान,कहय जम्मो महतारी।
बेटी दाई जान,इही ले हवय चिन्हारी।।
सुख-दुख रहिथों थाम,करौ मँय सेवा भारी।
धरथों नावा जीव,दरद सहिंथों मँय नारी।।

(3)
झन काटव जी रूख रई,एहा हावय शान।
जीवन हमला देत हे,इही बचावय प्रान।।
इही बचावय प्रान,एकठन पेड़ लगावव।
जीवन एमा जान,काट झन मान घटावव।।
पउधा रोज लगाव,जरी मा पानी डालौ।
देही बढ़िया छाँव,जान के रूख झन काटव।।

छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर,कोरबा,छत्तीसगढ़

सार छंद - समता जग मा बगरावौ


सार छंद - श्रीमती आशा आजाद

समता जग मा बगरावौ जी,भाईचारा लावौ।
समरसता के भाव रहै जी,उजियारा बगरावौ।

मनखे मनखे एक रहव जी,बोलिन सुग्घर बानी।
गुरुघासीदास ह मानौ जी,अब्बड़ राहिन ज्ञानी।

बाबा अम्बेडकर ह बोलिन,जात पात ला भूलौ।
समता के रद्दा म रेगौं,हिरदे मन ला छूलौ।

गाँधी जी के नेक वचन ला,सबझन सुग्घर मानौ।
झूठ लबारी गोठ त्याग के,सबला अपने जानौ।।

इँदिरा गाँधी सुग्घर बोलिस,नारी साहस धरलौ।
अनाचार ले जुरमिल लड़हूँ,तन लोहा कस रखलौ।।

झाँसी के रानी के हिम्मत,सबला ये सिखलाथे।
मुसकिल होवै कतको भारी,दुनियाँ ले लड़ जाथे।

छूआछूत ला दूर भगाके,सबझन मन दमकावौ।
मनुज रक्त हा एक हवे जी,मानवता अपनावौ।।

भेदभाव ला तोड़ौं जम्मो,झरखा द्वेष मिटावौ।
नारी के सम्मान करौ जी,देश ल सुघर बनावौ।।

शिक्षा के अनमोल रतन ला,जन जन मा फैलावौ।
अंतस हिरदे जोश जगाके,कमजोरी ल भगावौ।

छंदकार - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर, कोरबा छत्तीसगढ़

आल्हा छंद - हमर देश के जवान

हमर देश के जवान*

भारत हावय देश हमर जी,करें सुरक्षा बढ़थे मान।
सैनिक हावय मान हमर जी,इही बचावय सबके जान।।

फौजी बनके सेवा करथे,भारत भुइयाँ हवे महान।
दुश्मन ले लड़ जाथे ओमन,हमर देश के हावै शान।।

भारत के सीमा मा ठाड़े ,रात रात भर जागय जान।
नमन सबो झन इनला करलव,हावय देखौ सब बलवान।।

अपन खून ला बहा देय गा,लोहा लेथे अब्बड़ मान।
दिन देखय नइ रतिहा देखय,दे देथे जी अपने जान।।

भारत के झण्डा ला धरके,दुश्मन ला जी मार गिराय।
रखवाली सुन करय हमर गा,देख माथ सबके झुक जाय।।

अबड़ बहादुर हावय देखव,हमर देश के सबो जवान।
दुश्मन देखे थर-थर काँपै,ओखर करलौ सब गुनगान।।

मार गिरावाय हिम्मत ले वो,करें सामना बिन हथियार।
दुश्मन भागे देख फौज ला,सैनिक करथें सब उद्धार।।

बुरी नजर जे राखय सुनले,ओखर करथे गा संहार।
धर-धरके ओ मार गिराये,सैनिक के होथे ललकार।।

रचनाकार-श्रीमति आशा आजाद
पता-एसइसीएल मानिकपुर कोरबा, छत्तीसगढ़

कुकुभ गीत - भारत के सच्चा सेनानी

कुकुभ छंद गीत - श्रीमती आशा आजाद

भारत के सच्चा सेनानी,अब्बड़ मान बढ़ाथे गा,
रण मा कुर्बानी ले अपने,झण्डा ओ फहराथे गा।

हे शहीद कतका भारत मा,अब्बड़ खून बहाये हे
हिंदुस्तान के सान बान मा,मरके फर्ज निभाये हे
साहस रखके फर्ज निभाइन,दुश्मन मार गिराथे गा,
रण मा कुर्बानी ले अपने,झण्डा ओ फहराथे गा।

घर मा बइठे घरवाली हा,अपने फर्ज निभाये जी,
बच्चा ओखर अबड़ तरसथे,पालय कष्ट उठाये जी,
सुनके होगे ओ वीरगति ल,अपने होश गवाथे गा,
रण मा कुर्बानी ले अपने,झण्डा ओ फहराथे गा।

जंगल झाड़ी घाम जाड़ मा,तन मा अब्बड़ सहिथे गा,
रात रात भर जाग जाग के,रक्षा सबके करथे गा,
कठिन काज के जिम्मा लेवै,तभे सुरक्षा आथे गा।
रण पर कुर्बानी से अपने,झण्डा वो फहराथे गा।

दुश्मन झन घुस जावै कोनो,सीमा मा नजर गड़ाये हे,
भूख प्यास के होश कहाँ तब,जब संकट हा छाये हे,
भारत माता के रक्षा बर,लहूँ सदा दे जाथे गा,
रण मा कुर्बानी ले अपने,झण्डा ओ फहराथे गा।

छंदकार - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़









दोहा मुक्तक -माँ सरस्वती

दोहा मुक्तक छंद - श्रीमती आशा आजाद

हे दाई सुन सरस्वती,इही मोर गोहार,
नारी के दुख देख के,अब ले तँय अवतार,
विपदा अब्बड़ छाय हे,दाव मा लगगे लाज,
रोवत बिलखत आज सुन,नारी अत्याचार।

महिमा कतका गाव ओ,विद्या दाई तोर,
मनखे भूलिन मान ला,नता देय सब टोर,
जम्मो पीरा देख के,बइठे चुप्पे आज,
कलजुग के ए पाप ला,अब तँय कर संहार।

तँय देवी अस देख ले,नारी कतका रोय,
ज्ञान जोत ला बार दे,पाप कभू झन होय,
मनखे हिरदे ज्ञान भर,दे सुग्घर तँय सीख,
नारी के सबले बड़े,लाज कभू झन खोय,

अंधकार बगरे हवय,लुटत हवे सम्मान,
तँय वीणावरदायिनी,नर मा भरदे ज्ञान,
नारी अब कतका सहे,कोन जलाये जोत,
भर दे शक्ति हाथ मा,अतके दे वरदान।

छंदकार - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

Wednesday, 15 January 2020

दोहा मुक्तक

दोहा मुक्तक - श्रीमती आशा आजाद

मकर संक्रांति आय हे,जुरमिल जावौ आज,
बड़े बिहनिया स्नान कर,करदौ दान अनाज,
शुभ मंगल के दिन हवे,जम्मो कहय सियान,
अरपन जल ला जे करे,पूरा होथे काज।।

तिलकुट बनथे आज जी,गुण के सब पकवान।
मीठा तिल के लाड़ू जी,अबड़ बने मिष्ठान,
पतंगबाजी सब करे,खुशी मनावत संग,
आज अबड़ जी सान ले,दयँ गुड़ तिल के दान ।।

रहिथे अब्बड़ स्वाद जी,मूँगफली गुड़ के संग,
चारो कोती मखर के,छाये रहिथे रंग,
नवा फसल बर देव ला,सुमिरय बारंबार,
रंग बिरंगा देख लव,उड़थे सुघर पतंग।

नेपाली मनखे कहे,सुरुज मकर के सार,
कहय पंजाब लोहड़ी,माघी हे संस्कार,
तमिलनाडु कहिथे सुघर,पोंगल हावै नाम,
सुग्घर खिचरी राँध के,बाटय प्रेम अपार।।

सुरुज देव किरपा करौ,इही करय गोहार,
सुग्घर घर परिवार मा,सबके हो उद्धार,
सबझन बाँटय आज तो,मीठा गुड़ पकवान,
खुशियाँ सबला बाँट के,दयँ सुग्घर व्यवहार।।

छंद - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़




Saturday, 11 January 2020

कुकुभ छंद गीत-श्रीमती आशा आजाद

कुकुभ छंद गीत-श्रीमती आशा आजाद

छत्तीसगढ़ म जनमिस हीरा,वीर नरायण कहलावै।
सच्चा सेनानी ओ राहिन,भारत मा गुन ला गावै।।

अंग्रेज़ी सासन ले जूझिन,अबड़ रहिन जी ओ दानी।
कुर्रूपाट मा जनम लिहिन जी,करिन देश बर अगवानी।।
बिंझवार परिवार के बेटा,आज माथ ला चमकावै।
छत्तीसगढ़ म जनमिस हीरा,वीर नरायण कहलावै।।

नरभक्षी ओ शेर ल मारिन,ओखर पढ़लौ सब गाथा ।
अमर वीर के कुर्बानी ले,भारत के चमकिस माथा।
डरिस नही अंतस मन ले ओ,साहस सबके मन भावै।
छत्तीसगढ़ म जनमिस हीरा,वीर नरायण कहलावै।।

बहादुरी के अब्बड़ किस्सा,देश प्रेम अउ कुर्बानी।
ब्रिटिश राज हा मान बढ़ाइस,पदवी दिन आनी बानी।
जयस्तंभ के चौक म फाँसी,तोप तान के उड़वावै।
छत्तीसगढ़ म जनमिस हीरा,वीर नरायण कहलावै।।

बनिन स्वतंत्रता संग्रामी,याद रही ये बलिदानी।
छत्तीसगढ़ म अमर नाव हे,आज दिवस ला सब मानी।
हिरदे ले परनाम करौ जी,अइसन हीरा नइ आवै।
छत्तीसगढ़ म जनमिस हीरा,वीर नरायण कहलावै।।

छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

Friday, 10 January 2020

सरसी छंद गीत-श्रीमती आशा आजाद

सरसी छंद गीत-श्रीमती आशा आजाद

ए भुइयाँ मा देव सही हे,सुनलौ हमर किसान।
भूख प्यास के ये मिटोइयाँ,धरती के भगवान।।

मिहनत करके देवय हमला,भरय अन्न भंडार।
उपजावत हे साग अन्न ला,एखर ले संसार।
घर बइठे हम भोजन पाथन,इही हवय जी सान।
ए भुइयाँ मा देव सही हे,सुनलौ हमर किसान।।

आज बड़ा व्याकुल हे जानौ,दुख हा बड़ तड़पाय।
करजा मा बुड़गे हावय जी,पीरा नही मिटाय।
चुप बइठे सरकार आज तो,तँग खेती ले मान।।
ए भुइयाँ मा देव सही हे,सुनलौ हमर किसान।।

करजा जब अब्बड़ हो जाथे,बेचत हावय खेत।
फाँसी मा झूलत हावय सब,तभो करै नइ चेत।
भूख प्यास ले निसदिन मानौ,छूटत इँखर परान।
ए भुइयाँ मा देव सही हे,सुनलौ हमर किसान।।

काला बेचय काला खाये,नही किसानी मोल।
हरलौ दुख पीरा ला जम्मो,सुनलौ सबके बोल।
सुखी रहय जम्मो किसान मन,दयँ इनला सम्मान।
ए भुइयाँ मा देव सही हे,सुनलौ हमर किसान।।

छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

छंद पकैया छंद-श्रीमती आशा आजाद

छंद पकैया छंद-श्रीमती आशा आजाद

छन्न पकैया छन्न पकैया, खेती सुग्घर करलौ।
नव हे वैज्ञानिक तकनीकी,ध्यान सबो झन धरलौ।।

छन्न पकैया छन्न पकैया,सुग्घर ध्यान लगावौ।
नव नव तकनीकी ले सबझन,उन्नत फसल उगावौ।।

छन्न पकैया छन्न पकैया,जैविक खाद ल डालौ।
लाभ कमावौ सबझन बढ़ियाँ,जिनगी सफल बनालौ।।

छन्न पकैया छन्न पकैया,मछली पालन करलौ।
नव तकनीकी ले पालन कर,रोजगार नव धरलौ।।

छन्न पकैया छन्न पकैया,उन्नत बीज ल लावौ।
खेती कर उत्तम बीजा ले,खुशहाली ला पावौ।।

छन्न पकैया छन्न पकैया,ड्रिप विधि ला अपनावौ।
नव साधन ले करौ सिंचाई,उन्नत फसल ल पावौ।।

छन्न पकैया छन्न पकैया,लाभ योजना देही।
खेती हे जिनगी किसान के,ब्याज बैंक कम लेही।।

छन्न पकैया छन्न पकैया,सबले बढ़के खेती।
आशा सुग्घर बात बतावै,निक खेती के सेती।।

छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

मुक्तक छंद-श्रीमती आशा आजाद

मुक्तक छंद-श्रीमती आशा आजाद

नवा बछर

नवा बछर के बेरा आगे,आज सबो मिलजुल गावौ,
भाईचारा हिरदे रखलौ,समता ला सब बगरावौ,
सुग्घर भाखा सदा बोल हो,अइसन मन मा सब ठानौ,
समता के सब पाठ पढ़ौ जी,मानवता ला अपनावौ।।

मात पिता के सेवा करबो ,मन मा समझन ये ठानौ,
नाता भाई बहिनी के जी,हिरदे ले सबझन मानौ,
दीन दुखी के सेवा ले जी,पुन्य सदा घर मा आही,
विपदा सबके दूर भगावौ,कष्ट सबो के पहिचानौ।।

हिरदे मा सम्मान रखौ जी,जग के हावय महतारी,
नारी के हिम्मत बन जावौ,नइ हे अबला बेचारी,
ए कलजुग मा नेक सोच ले,फैलावौ सब उजियारा,
लाज बचाबो सब नारी के,समझौ ये जिम्मेदारी।।

नवा बछर मा नवा सोच हा,सबके हिरदे ला भावै,
मीठ मया के होवय भाखा,अइसन गीत ल सब गावै,
सदा ज्ञान ला जुरमिल बाटौ,सबो मिटावौ अँधियारा,
मार पीट अउ खून खराबा,द्वेष सबो हा मिट जावै।।

छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

सरसी छंद गीत-श्रीमती आशा आजाद

सरसी छंद गीत-श्रीमती आशा आजाद

मान हमर सावित्रीबाई,याद रखौ ये बात।
प्रथम शिक्षिका ओ कहलाइन,सुग्घर दिन सौगात।।

पति ज्योतिबा फुले जी राहिन,सुग्घर गुण के खान,
अपन ज्ञान जग मा बगराके,करिन देश उत्थान,
नेक ज्ञान ला सुग्घर बगराइन,दिन देखिन ना रात,
मान हमर सावित्रीबाई,याद रखौ ये बात।

दलित जाति ला शिक्षित करना,इही रहिस बस कर्म,
महिला मन ला ज्ञान बाँटना,समझिस अपने धर्म,
कष्ट अबड़ झेलिस जी सुनलौ,अबड़ करिन जी घात,
मान हमर सावित्रीबाई,याद रखौ ये बात।

अबड़ विरोधी मनखे राहिन,विपदा के बौछार,
हिम्मत ले ओ महानायिका,बनिस सत्य के सार,
वर्तमान मा अब्बड़ बढ़गे,शिक्षा के अनुपात,
मान हमर सावित्रीबाई,याद रखौ ये बात।

छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

कुकुभ छंद गीत-श्रीमती आशा आजाद

कुकुभ छंद गीत-श्रीमती आशा आजाद

छत्तीसगढ़ म जनमिस हीरा,गुरुघासीदास कहावै।
सच्चा मनखे उनमन राहिन,उँखर ज्ञान ला जग गावै।।

समता के नित पाठ पढ़ायिन,अबड़ रहिन जी ओ ज्ञानी।
गिरौधपुरी म जनम लिहिन जी,नेक संदेश के बानी।।
मंहगूदास के राहिन बेटा,अमरौतिन माँ कहलावै।
छत्तीसगढ़ म जनमिस हीरा,गुरुघासीदास कहावै।।

जात पात के घोर विरोधी,ओखर पढ़लौ सब गाथा ।
छत्तीसगढ़ म जनम लिये ले,आज अबड़ चमकिस माथा।
डरिस नही अंतस मन ले ओ,साहस सबके मन भावै।
छत्तीसगढ़ म जनमिस हीरा,गुरुघासीदास कहावै।।

बहादुरी के अब्बड़ किस्सा,जप तप ले बनगे ज्ञानी ।
सत्य प्रेम ला मन म जगाइन,सत्य नाम अमरित बानी।
समता के उजियारा करके,अंतस मन जोत जलावै।
छत्तीसगढ़ म जनमिस हीरा,गुरुघासीदास कहावै।।

छूआछूत ल दूर भगाइन,सरल साधारन ओ प्रानी।
छत्तीसगढ़ म अमर नाव हे,आज दिवस ला सब मानी।
हिरदे ले परनाम करौ जी,अइसन हीरा नइ आवै।
छत्तीसगढ़ म जनमिस हीरा,वीर नरायण कहलावै।।

छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

कुकुभ छंद गीत - श्रीमती आशा आजाद

कुकुभ छंद गीत - श्रीमती आशा आजाद

छत्तीसगढ़ म धान भरे हे,माटी अब्बड़ ममहावै।
छेरछेरा के तिहार आये,जुरमिल सब खुशी मनावै।।

सबो किसनहा अंतस मन ले,आज सुनौ झूमत हावै,
धान पान भंडार भरे हे,मनखे अब्बड़ मुसकावै,
पूजत हे अन्न धान ला सबझन,गुत्तुर भाखा मन भावै,
छत्तीसगढ़ म धान भरे हे,माटी अब्बड़ ममहावै।

अबड़ बने पकवान सुनौ जी,बरा बोबरा अउ चीला,
खुशी मनावत नाचत हावै,हँसी ठिठोली के लीला,
अन्न दान ला शुभ मानै जी,अन्न दान हा मन भावै,
छत्तीसगढ़ म धान भरे हे,माटी अब्बड़ ममहावै।

पौष माह के करय अगोरा,फोरय मुर्रा अउ लाई,
नवा फसल के करे कटाई,करय मिसाई सब भाई,
फरा बनावय चाउँर के जी,अबड़ मजा ले सब खावै,
छत्तीसगढ़ म धान भरे हे,माटी अब्बड़ ममहावै।

गाँव गली मा अबड़ सान ले,लइका मन भागत जाये,
छेरछेरा मा धान सबो ला,हेरहेरा ये चिल्लाये,
हमर राज मा पावन मानै,नेक परब समता लावै,
छत्तीसगढ़ म धान भरे हे,माटी हा बड़ ममहावै।

छंदकार - श्रीमती आशा आजाद
पता - मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़

कुकुभ छंद गीत-श्रीमती आशा आजाद

कुकुभ छंद गीत-श्रीमती आशा आजाद

छत्तीसगढ़ म जनमिस हीरा,गुरुघासीदास कहावै।
सच्चा मनखे उनमन राहिन,उँखर ज्ञान ला जग गावै।।

समता के नित पाठ पढ़ायिन,अबड़ रहिन जी ओ ज्ञानी।
गिरौधपुरी म जनम लिहिन जी,नेक संदेश के बानी।।
मंहगूदास के राहिन बेटा,अमरौतिन माँ कहलावै।
छत्तीसगढ़ म जनमिस हीरा,गुरुघासीदास कहावै।।

जात पात के घोर विरोधी,ओखर पढ़लौ सब गाथा ।
छत्तीसगढ़ म जनम लिये ले,आज अबड़ चमकिस माथा।
डरिस नही अंतस मन ले ओ,साहस सबके मन भावै।
छत्तीसगढ़ म जनमिस हीरा,गुरुघासीदास कहावै।।

बहादुरी के अब्बड़ किस्सा,जप तप ले बनगे ज्ञानी ।
सत्य प्रेम ला मन म जगाइन,सत्य नाम अमरित बानी।
समता के उजियारा करके,अंतस मन जोत जलावै।
छत्तीसगढ़ म जनमिस हीरा,गुरुघासीदास कहावै।।

छूआछूत ल दूर भगाइन,सरल साधारन ओ प्रानी।
छत्तीसगढ़ म अमर नाव हे,आज दिवस ला सब मानी।
हिरदे ले परनाम करौ जी,अइसन हीरा नइ आवै।
छत्तीसगढ़ म जनमिस हीरा,वीर नरायण कहलावै।।

छंदकार-श्रीमती आशा आजाद
पता-मानिकपुर कोरबा छत्तीसगढ़